घनश्याम सिंह-
हाथरस। यह बात सच है कि कोरोना काल में आम लोगों के एक वर्ग पर आर्थिक तंगी का साया है। इस कारण मध्यम व निचले तबके के परिवार तो बच्चों की फीस तक नहीं भर पाए हैं। ऐसे में कुछ विद्याथियों के रिश्तेदारों ने मदद की। उन्हीं में एक नाम राशि ओझा का भी है। राशि ने 89.16 फ़ीसदी अंको से 10वीं की परीक्षा पास की है। उसके परिजन व रिश्तेदार बेहद खुश हैं।
यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले तमाम ऐसे विद्यार्थी थे, जिनके अभिभावक कोरोना काल में बेरोजगार हो गए थे। ऐसे में परिवार के खाने-पीने के साधनों को जुटाने में ही लोगों के पसीने छूट रहे थे। ऊपर से स्कूल-कॉलेजों की फीस ने तो कुछ परिवारों को काफी मजबूर कर दिया। सादाबाद के गांव नीति निवास की रहने वाली छात्रा राशि ओझा पुत्री सुनील ओझा ने भी काफी परेशानी का सामना किया। जब कॉलेज संचालक ने फीस जमा करने का दबाव बनाया तो इस बारे में उसने अपने रिश्तेदारों को बताया। इस पर रिश्तेदारों ने उसकी फीस की व्यवस्था की और तक कहीं जाकर राशि को प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिली।
राशि ने बताया कि उनके पिता चक्की चलाते हैं। कोरोना के कारण काम मंदा हो गया, लेकिन इस परेशानी में उसके रिश्तेदार बहुत की मददगार साबित हुए। राशि ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, रिश्तेेदार व कॉलेज के शिक्षकों को दिया। राशि की मां सुधा ओझा गृहणी हैं। तीन बड़ी बहनें हैं, जिनमें राशि से बड़ी बहन रिंकी ओझा है, जबकि उससे बड़ी दो बहनों मधु और इशिका की शादी हो गई है। राशि की इच्छा बैंकिंग क्षेत्र में जाने की है, लेकिन अब उसके सामने समस्या यह भी है कि आसपास ऐसा कोई कॉलेज नहीं है, जिसमें कॉर्मस की पढ़ाई हो।