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हाथरस : न नई बस सेवा शुरू हुई, न प्रमुख ट्रेनों का हुआ ठहराव

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हाथरस : रोडवेज कार्यशाला में खड़ी बसें। संवाद - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले की परिवहन सेवाएं इस साल भी बदहाल रहीं। पूरे साल रोडवेज बसों की किल्लत बनी रही और यात्री परेशान रहे तो प्रमुख ट्रेनों का ठहराव हाथरस के स्टेशनों पर पूरे साल नहीं हुआ।
कई ट्रेनों का ठहराव हो गया बंद
हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन से कई ट्रेनें गुजरती हैं। काफी प्रयास के बाद भी कई ट्रेनों का ठहराव नहीं हुआ। इसके अलावा सर्दियों के सीजन में साप्ताहिक चलने वाली मथुरा-छपरा एक्सप्रेस ट्रेन भी बंद हो गई। हाथरस जंक्शन स्टेशन पर महानंदा, कालका और मूरी सहित कई ट्रेनों के ठहराव बंद हो गया। महानंदा व कालका एक्सप्रेस के ठहराव के लिए जनप्रतिनिधियों से रेलवे अफसरों से मांग की, लेकिन आज तक हालत जस के तस बने हुए हैं। इसका खामियाजा मुसाफिरों को भुगतना पड़ रहा है।
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दो दर्जन बसें खड़ी रहीं कार्यशाला में
हाथरस। कोरोना काल के चलते इस साल जिले के लोगों के लिए रोडवेज की किसी नई सेवा की शुरुआत नहीं हुई। इसके अलावा खास बात यह रही कि सामान के अभाव में दो दर्जन से अधिक बसें कार्यशाला में खड़ी रहीं। इस कारण यात्रियों को गंतव्य तक की दूरी तय करने में मुश्किल भरा सफर करना पड़ा। इस साल डिपो को कोई नई बस भी नहीं मिली है। नीलामी वाली बसों को दौड़ाकर आमदनी का ग्राफ बढ़ाया जा रहा है। इस कारण आए-दिन ये बसें बीच रास्ते में यात्रियों का साथ छोड़ देती हैं। डिपो औसतन 10 से 12 लाख रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित करता है। संवाद
एआरटीओ में बदली व्यवस्था दे रही लाभ
संभागीय परिवहन विभाग में इस साल काफी बदलाव नजर आया। पहले सुबह दस बजे से पांच बजे तक ड्रइाविंग लाइसेंस बनाने का काम होता था। इस साल कोरोना को देखते हुए तीन शिफ्टों में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की शुरुआत हुई। जो समय आवेदक को ऑनलाइन मिला। आवेदक अपनी सुविधा अनुसार ऑनलाइन स्लॉट ले सकता है। उसी समय पर उसके कागजी प्रक्रिया को पूरा किया गया। इससे आवेदकों को चक्कर काटने से राहत मिली। इसके अलावा गाड़ियों की फिटनेस का काम ऑनलाइन हुआ। इसके अलावा यह सुविधा दी गई कि गाड़ी कही से खरीदों रजिस्ट्रेशन गृह जिले में होगा। भारत सीरज की शुरुआत की गई। इस सीरज के तहत नंबर लेने से वाहन ट्रांसर्फर का बोझ कम हुआ। साथ ही सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत तीन कार्यक्रमों का हुआ। जिले भर में पूरे साल में 5377 ऑनलाइन चालान काटे गए। संवाद
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ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए नहीं हुए कोई प्रयास
जिले में कई सालों से उद्यमियों द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की मांग की जा रही है। व्यापारियों व ट्रासंपोर्टरों की मांग इस साल भी अधूरी रही। अभी तक जिला प्रशासन की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर के लिए जमीन की तलाश तक नहीं की गई है। इस कारण वाहन शहर के मुख्यमार्गो पर फुटपाथों पर खड़े रहते हैं। इस कारण सुबह से शाम तक लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। इसके अलावा बाजरों में अतिक्रमण का बोलबाला रहा। इस कारण लोगों का राह तय करना मुश्किल हो गया। संवाद
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