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हाथरस : पंचग्रही योग में लक्ष्मी गणेश पूजन होगा फलदायी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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प्रकाश का पहरा और ढेर सारी खुशियां लेकर दिवाली का त्योहार आ गया है। जिलेभर में बृहस्पतिवार को दीपोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। धनतेरस पर लोगों का पूरा दिन बाजारों में खरीदारी करने में गुजरा। लोगों ने पूजन की तैयारियां भी कर लीं। पूजन के समय को लेकर जरूर भ्रम की स्थिति है, फिर भी अधिकतर धर्माचार्य प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन को कल्याणकारी बता रहे हैं। इस बार पंचग्रही योग ने पूजन की महत्ता और बढ़ा दी है।
बृहस्पतिवार को शहर का कोना-कोना दीपक और मोमबत्ती के प्रकाश से रोशन होगा। घर और दुकान के साथ मंदिरों में भी लक्ष्मी-गणेश जी स्तुति कर सर्वकल्याण की कामना की जाएगी। इस बार दिवाली पर तुला राशि में शनि, राहु, बुध, सूर्य और चंद्रमा का मिलन होने से पंचग्रही योग बन रहा है। इसे धर्माचार्य श्रेष्ठ बता रहे हैं। इस बार लक्ष्मी पूजन और कल्याणकारी होगा। शाम को पांच बजकर 11 मिनट से आठ बजकर दस मिनट तक पूजन का शुभ समय है।
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ये हैं पूजन के शुभ मुहूर्त
हाथरस। धर्माचार्यों के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन सुबह से ही लक्ष्मी पूजन किया जा सकता है। चंचल बेला में सुबह 08.14 से सुबह 09.37 तक, लाभ और अमृत बेला में सुबह 09.37 से दोपहर 12.21 तक, शुभ बेला में दोपहर 01.43 से दोपहर 03.04 तक, कुंभ लग्न में दोपहर 02.02 से दोपहर 03.33 तक, गौधूरि प्रदोष काल में शाम पांच बजकर 11 मिनट से आठ बजकर दस मिनट तक, वृष लग्न में शाम 06.37 से रात्रि 08.33 तक लक्ष्मी पूजन किया जा सकता है। परिणामस्वरुप शाम पांच बजकर 11 मिनट से से रात्रि आठ बजकर दस मिनट तक लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम समय है। प्रदोष काल में पूजन शुभ रहता है। कुछ लोग मध्यरात्रि में स्थिर लक्ष्मी के लिए पूजन करते हैं। ऐसे लोग सिंह लग्न में रात्रि 12 बजकर 40 मिनट से सुबह तीन बजे तक मध्य लक्ष्मी जी की स्तुति कर सकते हैं। संवाद
अबकी बार स्वास्ति नक्षत्र आ रहा है। इस बेला को प्रीति चतुस्पद योग कहते हैं। यह योग करीब 51 वर्षों के बाद पड़ रहा है। बहीखाता का पूजन चंचल बेला में शुभ माना जाता है। दोपहर 11 बजे से साढ़े 12 बजे तक अभिजित मुहूर्त रहेगा। इस मुहूर्त में बही लेखन, दुकान पूजन, व्यापार प्रतिष्ठान का पूजन, किया जा सकता है, जो शुभ रहेगा। चिरस्थायी अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ, कनक धारा स्रोत का पाठ और लक्ष्मी की आराधना करें। दरिद्रता को दूर भगाने चाहते हैं तो दरिद्र दहन स्रोत का पाठ करें।
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-आचार्य वल्लभ जी महाराज
बृहस्पतिवार को लक्ष्मी गणेश पूजन के लिए प्रदोष काल शुभ है। इस बार पंचग्रही योग में पूजा-अर्चना सुख समृद्धि प्रदान करेगा। पांच बजकर 11 मिनट से आठ बजकर दस मिनट तक पूजा काफी फलदायी होगी। चंचल बेला में दुकान और प्रतिष्ठान का पूजन किया जा सकता है। बुधवार को छोटी दिवाली है। इसे नरक चतुदर्शी एवं रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन मिट्टी का चार मुंह वाला दीप. मुख्य द्वार की नाली के ऊपर पर जलाएं। अहोई अष्टमी के दिन रखे गए जल को पानी में मिलाकर स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है। ओंगा के वृक्ष की जड़ से रोगी के ऊपर सात बार उतारा किया जाए, जिससे रोगी का रोग नष्ट होता है।
-आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी
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