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हाथरस : हिंदी मात्र भाषा नहीं, हमारे स्वाभिमान और गौरव का प्रतीक है

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पुष्पेन्द्र सिंह, शिक्षक। संवाद - फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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हिंदी हमारी मातृ भाषा है। यह हमारे गौरव और स्वाभिमान की प्रतीक है। हमारी पहचान है। बच्चे हों या बड़े सभी अपनी भावनाओं को जितने सहज तरीके से हिंदी में व्यक्त कर सकते हैं। वह अन्य किसी भाषा माध्यम से संभव नहीं है। यह कहना है शहर के शिक्षकों का।
अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को हिंदी भाषा के सर्वाधिक प्रयोग करने के प्रति प्रोत्साहित करें। उन्हें हिंदी का महत्व बताएं। हिंदी दिवस मनाने का कारण भी बताएं। बच्चों को हिंदी की श्रेष्ठ कहानियां सुनाएं। उनसे निबंध लेखन कराएं। ताकि उनकी मातृभाषा के प्रति आकर्षणता बढ़े।
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- प्रवीन कौशिक, शिक्षक
वर्तमान में अभिभावक बच्चों को हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। यहीं से भाषा के साथ ही हिंदी का पतन शुरू हो जाता है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को मातृभाषा के विकास के लिए समर्पित होना चाहिए।
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- योगेश शर्मा, शिक्षक
सभी देश वासियों के विकास की भाषा हिंदी है। हिंदी के माध्यम से अपनी भावनाओं को श्रेष्ठता के साथ व्यक्त कर सकते हैं। भाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है, लेकिन जब संवाद की बात हो हिंदी भाषा ही होनी चाहिए। भाषा सिर्फ ज्ञान नहीं बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करती है।
- पुष्पेंद्र सिंह, शिक्षक

योगेश सिंह, शिक्षक। संवाद- फोटो : HATHRAS

प्रवीन कौशिक,शिक्षक।संवाद- फोटो : HATHRAS

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