न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना का ग्रहण इस बार भी मेला श्रीदाऊजी महाराज के आयोजन पर न लग जाए। अभी तक इसके आयोजन की कोई तैयारी शुरू नहीं की गई है। मेले के दौरान शहर में 15 दिन तक खासी रौनक रहती है। बदलते परिवेश में अब यह मेला महोत्सव का रूप ले चुका है। इसकी अनौपचारिक शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और बल्देव छठ से औपचारिक शुभारंभ होता है।
ऐतिहासिक किला स्थित राजा दयाराम परिसर में हर साल बृज क्षेत्र के लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते मेला नहीं लगा था। इस समय जिला कोरोना मुक्त है। वैक्सीनशन भी हो रहा है। धीरे-धीरे कोविड गाइड लाइन के तहत बाजार भी खुलना शुरू हो गए हैं। इससे मेला प्रेमियों को मेले के आयोजन की उम्मीद नजर आ रही है। अगले 15 दिन तक होने वाले आयोजनों से शहर की सड़कें सुबह से रात लोगों के आवागमन के चलते गुलजार रहती हैं।
1912 से लगातार लग रहा मेला
किला क्षेत्र में लगने वाला लगने वाला मेला हिंदू मुस्लिम एकता व सद्भाव का प्रतीक है। वर्ष 1912 में तत्कालीन तहसीलदार श्याम लाल ने इसकी शुरुआत की थी। उन्हें स्वप्न हुआ कि वह श्रीदाऊजी महाराज की पूजा-अर्चना के साथ किला परिसर में मेले का आयोजन करें। ऐसा करने से उनका बीमार बेटा स्वस्थ हो जाएगा। तब से यहां प्रति वर्ष मेले का आयोजन हो रहा है। यह मेला अब श्रीदाऊजी महाराज महोत्सव के रूप में तब्दील हो गया है।
मेला श्रीदाऊजी महाराज बृज क्षेत्र का लक्खी मेला है। पिछली बार भी हमने सूक्ष्म रूप में कार्यक्रम किया था। इस बार मेला श्रीदाऊजी महाराज का 110वां वर्ष है। मेले के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
-जितेंद्र स्वरूप शर्मा, अध्यक्ष वेद भगवान सनातन धर्म सभा
कोविड 19 की गाइड लाइन के तहत परंपरा के अनुसार लक्खी मेला लगना चाहिए। मंदिर व गर्भगृह की रंगाई-पुताई होनी चाहिए। हरियाली तीज पर रेवती मैया के मेले का कार्यक्रम भी होना चाहिए। यदि अनुमति नहीं मिलती है सूक्ष्म रूप में आयोजन किया जाएगा।
-अतुल आंधीवाल, पूर्व अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन