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हाथरस : स्कूलों में बनेंगे बाल वन, काका हाथरसी वन होगा विकसित

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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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जिले में आज से पौधरोपण अभियान शुरू किया जाएगा। पौधरोपण का लक्ष्य पिछली बार से ज्यादा है। इस बार 25 लाख 70 हजार 760 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान में वन विभाग के अलावा 21 विभागों को जोड़ा गया है। इस बार हास्य व्यंग्य के कवि काका हाथरसी के नाम पर भी वन विकसित किया जाएगा तो वहीं, स्कूलों में बाल वन बनाए जाएंगे।
वन विभाग हर साल अन्य विभागों के सहयोग से वृहद स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाता है। इस बार भी यह चार चरणों में चलेगा। अभियान में वन विभाग के अलावा 21 अन्य विभाग भी जुटे हैं। सभी विभागों को पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है।
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इसके लिए स्थल चयनित कर लिए गए हैं। नर्सरी से पौधरोपण वाले स्थानों पर पौधे मंगवा लिए गए। इस बार स्कूलों में बाल वन, सीवेज फार्म भूमि पर काका हाथरसी वन भी बनाया जाएगा। इसके अलावा छायादार, फलदार, शोभाकार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए सभी विभागों व वन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली है।
हाथरस में इन स्थानों पर बनेंगे वन
- स्कूलों में बीएसए द्वारा बाल वन बनाया जाएगा। इसमें फलदार, शोभाकार, छायादार पौधे लगाए जाएंगे।
- डीआईओएस द्वारा बागला इंटर कॉलेज आदि कॉलेजों में युवा वन की स्थापना की जाएगी। इसके लिए सात कॉलेज चयनित किए गए हैं।
- डीएचओ द्वारा फल वाटिका लगाई जाएगी। इसके लिए दस जगहों को चयनित किया गया है।
- पालिका अधिकारी द्वारा किला परिसर में पौधरोपण कर दाऊजी वन बनाया जाएगा।
- पालिका ईओ की देखरेख में जलेसर रोड सीवेज फार्म की भूमि पर काका हाथरसी वन विकसित किया जाएगा।
- सासनी के सुसायत में दस हजार छायादार व फलदार पौधे रोपने के साथ शक्ति वन बनाया जाएगा।
- सासनी के सुसायत में करोड़ों की लागत से नगर वन बनाया जाएगा। इसके काम की जल्द शुरुआत होगी।
देखभाल के अभाव में नष्ट हो गए पौधे
पिछले साल शासन ने यहां वन विभाग सहित अन्य विभागों को 24 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य दिया था। इसमें अन्य विभाग की जुटे थे। पौधे तो रोप दिए गए लेकिन इनकी देखभाल नहीं की गई। कुछ की सिंचाई नहीं हुई तो कुछ की सुरक्षा नहीं हुई।
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अधिकांश पौधों में ट्री गार्ड नहीं लगाए गए। ऐसे में ज्यादातर पौधे उजड़ गए या सूख गए। कुछ को पशुओं ने अपना निवाला बना लिया। डीएफओ डॉ. सीपी सिंह का कहना है कि इस बार पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग कराई जा रही है। सुरक्षा खाई खुदवाई जा रही है। उनका कहना है कि पिछले साल भी सर्वे कराया गया तो उसमें सभी पौधे सही मिले।
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