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रंजिश में चचेरे भाइयों ने कराई थी अधेड़ की हत्या

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हरदोई। संडीला कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर गांव में 16 मार्च को रात दरवाजे पर सोते समय हुई अधेड़ की हत्या का शनिवार को पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। पुलिस का दावा है कि मुकदमे की रंजिश में चचेरे भाइयों ने दो युुवकों को 20 हजार देने का लालच देकर अधेड़ की हत्या कराई थी। पुलिस लाइन में एसपी राजेश द्विवेदी ने घटना का खुलासा कर आरोपियों को जेल भेज दिया।
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एसपी ने बताया कि संडीला क्षेत्र के जलालपुर गांव निवासी रामचंद्र ने 17 मार्च को कोतवाली में सूचना देकर बताया था कि 16 मार्च को रात उसका भाई बालगोविंद (50) दरवाजे के बाहर सो रहे थे।
गांव निवासी अभिजीत कुमार, गंगाराम, सियाराम, अमित ने धारदार हथियार से वार कर घायल कर दिया था। जिसकी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
पीड़ित की तहरीर पर चारों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। घटना के खुलासे को स्वॉट, सर्विलांस, एसओजी टीमें लगाई गईं थीं।
विवेचना के दौरान कई पहलुओं पर जांच करने पर आरोपियों के नाम रंजिशन लिखाने की बात सामने आई, जबकि बालगोविंद की हत्या किसी नजदीकी द्वारा विपक्षियों को फंसाने के लिए कराई गई थी।
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इस आधार पर घटना में संलिप्त गांव निवासी जगदीश, होरीलाल को शनिवार को टीम ने उन्नाव मार्ग स्थित भट्ठे के पास से दबोच लिया। पूछताछ में दोनों ने बालगोविंद की हत्या करने की बात कबूली। आरोपियों ने बताया कि बालगोविंद की चचेरे भाई विमल त्रिवेदी व ललित त्रिवेदी ने दोनों को 20 हजार रुपये का लालच दिया था। विमल ने अपने घर से बांका लाकर दिया था। उसी बांके से जान से मारने की नियत से बालगोविंद पर प्रहार किए थे। शोर मचाने पर मां के बाहर आने पर दोनों फरार हो गए थे। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने बांका जगदीश के घर से बरामद कर लिया। आरोपियों के बयान के आधार पर विमल व ललित को गांव की मोड़ से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
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बालगोविंद की हत्या की ये बनी वजह
बालगोविंद की हत्या की वजह दुश्मनों से बदला लेना था। पूछताछ में आरोपी चचेरे भाइयों ने बताया कि वर्ष 2006 में विपक्षी सियाराम अनुसूचित जाति उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। जिसमें हाईकोर्ट उसे विमल को सजा सुनाई गई थी। इसी दौरान विमल का कोटा भी निरस्त हो गया था। उसका कोटा वर्तमान प्रधान अभिजीत के समर्थक गंगाराम को मिल गया था। वहीं, वह प्रधानी का चुनाव भी हार गया था। इससे उसने होलीलाल और जगदीश को 20 हजार का लालच देकर चचेरे भाई की हत्या कराई थी, जिससे चारों विपक्षी जेल चले जाएं कोटा उसे मिल जाए।
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