हरदोई। डेंगू और मलेरिया के बीच जनपद में स्क्रब टायफस ने भी दस्तक दे दी है। दो लोगों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। सितंबर में अब तक 45 बुखार पीड़ितों की स्क्रब टाइफस की जांच कराई जा चुकी है।
पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमण तो नियंत्रण में है, लेकिन बुखार लगातार पैर फैला रहा है। जनपद में डेंगू, मलेरिया और वायरल से पीड़ित लोगों की नई संख्या हर रोज सामने आ रही है। कई बार बुखार आने पर डेंगू ओर मलेरिया की रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी लोगों का बुखार कम नहीं हो रहा। जालौन समेत कई अन्य जनपदों में स्क्रब टाइफस के रोगी पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में भी स्क्रब टाइफस की जांच कराना शुरू कर दी। महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि स्क्रब टाइफस की जांच के लिए 45 मरीजों के नमूने लिए गए थे। इनमें से दो मरीज स्क्रब टाइफस से पीड़ित मिले हैं।
जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. शेर सिंह ने बताया कि दो मरीज मिलने की बात संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि एलआईजा और पीसीआर पद्धति से इसकी जांच की जाती है। एंटी बैक्टीरियल दवाएं पीड़ित को दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
ये हैं स्क्रब टाइफस के लक्षण
जिला चिकित्सालय के ईएमओ डॉ. शेर सिंह बताते हैं कि स्क्रब टाइफस के लक्षण चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने के दस दिन के अंदर दिखने लगते हैं। बुखार, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर और मांस पेशियों में दर्द, चिड़चिड़ा होना, शरीर पर चकत्ते पड़ना आदि इसके लक्षण हैं।
ऐसे फैलता है स्क्रब टाइफस
डॉ. शेर सिंह के मुताबिक स्क्रब टायफस को शर्ब टाइफस भी कहते हैं। यह एक विशेष बैक्टीरिया के कारण फैलता है। यह बैक्टीरिया लोगों में तब फैलता है जब किसी को संक्रमत चिगर्स (लार्वा माइट्स) काट ले। यह बीमारी मच्छरों जैसे दिखने वाले लार्वा से फैलती है। किसी चूहे, कुत्ते आदि को यह लार्वा संक्रमित कर देता है। संक्रमित चूहे से भी यह बीमारी फैलती है।