सिकंदरपुर स्थित सर्वोदय आश्रम में संचालित बेटियों और महिलाओं के उत्थान से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी लेने के बाद राज्यपाल ने समाजसेवा से जुड़े अहम लोगों को संबोधित किया।
प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि नारी जागृत होती है तो परिवर्तन जल्द आता है। नारी में शक्ति और कौशल दोनों हैं। इनको निखारने का कार्य आजादी के बाद से ही तेज होना चाहिए था, लेकिन धीरे-धीरे ही सही अब पिछले कुछ वर्ष में इस कार्य में तेजी आई है।
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अब महिलाएं अक्षर ज्ञान से लेकर रोजगारपरक ज्ञान पा रही हैं। गुरुवार को सिकंदरपुर स्थित सर्वोदय आश्रम में संचालित बेटियों और महिलाओं के उत्थान से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी लेने के बाद राज्यपाल ने समाजसेवा से जुड़े अहम लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि 1947 में देश आजाद होने के बाद भी बेटियों और महिलाओं को मजबूती देने के कार्य को किया गया, लेकिन इसकी गति धीमी रही। पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी आई है।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि बेटियों का पढ़ना बहुत जरूरी है। महिलाओं और बेटियों को अक्षरज्ञान के साथ-साथ हुनरमंद भी बनाया जा रहा है। इससे वे अपने परिवार को पढ़ा लिखा भी सकती हैं और आर्थिक रूप से भी सहायता दे सकती हैं।
सर्वोदय आश्रम के कार्यक्रमों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि लोग स्वयंसेवी संगठनों को आर्थिक सहायता देते हैं और लगातार देना चाहते हैं, लेकिन इससे पहले यह भरोसा भी कर लेना चाहते हैं कि उनके धन का सदुपयोग हो रहा है।
गांधी, विनोबा और राजा राममोहन राय का किया जिक्र
राज्यपाल ने अपने संबोधन के दौरान जब नारी सशक्तीकरण का जिक्र किया तो महात्मा गांधी, विनोबा भावे और राजा राममोहन राय का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले सती प्रथा चलती थी। पति की मौत होने पर उसकी पत्नी को भी चिता में जिंदा जलना होता था।
राजा राममोहन राय ने इसके विरुद्ध गुलाम भारत में भी आवाज उठाई और प्रथा को बंद करा दिया। उन्होंने कहा कि उन दिनों परिस्थितियां विपरीत थीं, लेकिन राजा राममोहन राय की इच्छाशक्ति मजबूत थी। राज्यपाल ने कहा कि गांधी जी कहते थे कि अगर एक बालिका को शिक्षित किया है तो उसकी सात पुश्तें भी शिक्षित होंगी।
एक बालिका आगे चलकर न जाने कितने स्वरूपों में सक्रिय नजर आती है। कभी मां, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी बहू होने की बात उन्होंने कही। विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और इसके जरिए किसानों को मजबूती मिलने का भी जिक्र राज्यपाल ने अपने संबोधन में किया।
दूधपीती प्रथा का किया जिक्र
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने संबोधन के दौरान गुजरात की दूधपीती प्रथा के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि यूपी में पता नहीं इसे क्या कहते हैं, लेकिन गुजरात में बहुत पहले कन्या का जन्म होते ही परिवार के ही लोग दूध से भरी थाली या बाल्टी में नवजात को डुबो देते थे और इससे इसकी मौत हो जाती थी।