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तालाब की खुदाई और मछली पालन के नाम पर अनुदान हड़पा

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फोटो-18- मंगलीपुरवा स्थति तालाब का निरीक्षण करतीं सीडीओ आकांक्षा राना। फाइल फोटो - फोटो : HARDOI
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हरदोई। विभिन्न योजनाओं में पात्रों के चयन से लेकर योजना के क्रियान्वयन तक में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति की धज्जियां जनपद में उड़ रही हैं। ताजा मामला मत्स्य विभाग की नीली क्रांति योजना से जुड़ा है। जनपद में उक्त योजना के तहत कराए गए तीन कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। तीन कार्यों में नौ लाख 26 हजार 902 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है।
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मत्स्य विभाग की ओर से नीली क्रांति योजना का संचालन किया जाता है। इस योजना के तहत तालाब खुदाई के लिए पात्रों को अनुदान दिया जाता है। तालाब की खुदाई पूरी होने के बाद निवेश यानी मछली पालन के लिए भी अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। बीते दिनों मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना ने मत्स्य विभाग के नीली क्रांति योजना के तहत बनाए गए एक तालाब का निरीक्षण किया था। स्थिति का वास्तविक आंकलन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित कर योजना के तहत लाभांवित किए गए लोगों के कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट में चौंकाने वाली हकीकत भी सामने आ गई।
अहिरोरी विकास खंड के मंगलीपुरवा में रजनी गुप्ता, संडीला विकास खंड के मलैया में एहसान अली और बेंहदर विकास खंड के ग्राम गल्लामंडी में सुनीता जायसवाल को नीली क्रांति योजना के तहत दिए गए लाभ में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। सीडीओ आकांक्षा राना ने सहायक निदेशक मत्स्य रेखा श्रीवास्तव को दो अगल-अलग कारण बताओ नोटिस जारी कर वित्तीय अनियमितता पर जवाब मांगा है। सीडीओ ने बताया कि संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर अनुदान की राशि की रिकवरी कराई जाएगी और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को लिख दिया जाएगा।
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संडीला के ग्राम मलैया निवासी एहसान अली को तालाब खुदाई और फिर निवेश के नाम पर दो लाख 80 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए। जांच टीम को स्थलीय सत्यापन में पता चला कि मौके पर बंधे बनाकर चार तालाब तैयार किए गए हैं, यानी तालाब की खुदाई हुई ही नहीं। इन्हीं में से एक तालाब को मत्स्य विभाग का तालाब बताया गया। तालाबों की माप न तो आगणन के अनुरूप मिली और न ही एमबी के अनुरूप। सीधे सीधे दो लाख 80 हजार रुपये के अनुदान का दुरुपयोग जांच टीम ने माना है।
बेंहदर विकास खंड के गल्ला मंडी में सुनीता जायसवाल को चार लाख बीस हजार रुपये का अनुदान दिया गया है। यहां तो भट्ठे के लिए निकाली गई मिट्टी के बाद हुए गड्ढे में ही बंधे बनाकर चार तालाब तैयार कर लिए गए। इन तालाबों में से एक तालाब को मत्स्य विभाग का तालाब बता दिया गया, जबकि आगणन और एमबी के आधार पर मौके पर कोई कार्य नहीं मिला। चार लाख बीस हजार रुपये का पुरा दुरुपयोग माना गया है। यहां मछली पालन के लिए 90 हजार रुपये की सब्सिडी दी गई, लेकिन मछली पालन हो ही नहीं रहा था।
अहिरोरी विकास खंड के मंगलीपुरवा में रजनी गुप्ता को नीली क्रांति योजना के तहत तीन लाख 36 हजार रुपये का अनुदान दिया गया। यहां तालाब की खुदाई का कार्य मानक के अनुरूप हुआ ही नहीं। निवेश यानी मछली पालन के नाम पर भी 72 हजार रुपये का अनुदान रजनी गुप्ता को उपलब्ध कराया गया, लेकिन मछली पालन होता नहीं मिला। जांच टीम ने यहां एक लाख 36 हजार 902 रुपये की वित्तीय अनियमितता होने की पुष्टि की है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद से मत्स्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के साथ-साथ लाभार्थियों में भी खलबली मची है।
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