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दुग्ध संघ को ऑक्सीजन की दरकार

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हरदोई। 40 साल पहले जिले में दूध व्यवसाय का प्रमुखता से आगाज करने वाले दुग्ध संघ को ऑक्सीजन की दरकार है।
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बंदी की कगार पर आ रहे संघ में दूध की आमद 50 हजार लीटर से एक हजार लीटर प्रतिदिन तक सिमट गई है। एक हजार गांवों तक पहुंच रखने वाला संघ अब करीब 50 गांवों तक सिमट गया है।
दुग्ध संघ को विस्तार के लिए शासन से संसाधनों एवं सहायता की दरकार है। 1980 के दशक में जिले में किसानों को दुधारू पशुओं का पालन कर दूध व्यवसाय के लिए गांव गांव प्लेटफार्म देने की शुरुआत दुग्ध संघ ने की थी।
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तब बिलग्राम तहसील क्षेत्र के गांवों में किसानों की समितियां बनाकर शुरुआत हुई थी। दो हजार लीटर प्रतिदिन दूध की आमद से शुरू हुआ संघ का सफर 50 हजार लीटर प्रतिदिन तक रहा है।
तब इकलौता खरीद प्लेटफार्म होने से किसानों के लिए दूध के जरिए आमदनी का सबसे बड़ा माध्यम संघ रहा। खरीद सेंटरों पर पारदर्शिता रखने एवं किसानों को समुचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए बड़ी पहल हुई।
दुग्ध संघ ने 98 स्थानों पर आटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सेेंटर स्थापित किए। 18 स्थानों पर बल्क मिल्क कूलिंग यूनिट लगाई थी, लेकिन यह सब धीरे-धीरे कम होते गया। अब यह सुविधाएं न के बराबर बची हैं।
लखनऊ दुग्ध संघ में हो चुका विलय
दो वर्ष पहले दुग्ध संघ का विलय लखनऊ दुग्ध संघ में कर दिया गया था। पराग के जरिए दूध की खरीद के साथ ही भुगतान हो रहा है। यहां लगा दुग्ध प्लांट अब सिर्फ दूध की आमद एवं लखनऊ तक आपूर्ति तक सिमट गया है।
बोले किसान, समय से हो भुगतान
दुग्ध उत्पादक रामू का कहना है कि फिर गांव-गांव दुग्ध संघ की डेयरी खुलनी चाहिए। सरकारी डेयरी न होने से गांव के बाहर दूध लेकर जाना पड़ता है, जिससे दिक्कतें होती हैं।
राम किशोर ने कहा कि अब निजी क्षेत्र की डेयरी एवं दूधियों का सहारा है। सरकारी डेरी खुलनी चाहिए। पशु पालक पुष्पा ने कहा कि गांव में डेयरी होने से सुविधा रहती है। पशुओं के इलाज के लिए गांवों में चिकित्सा सेंटर भी खोले जाने चाहिए।
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पशुपालक सुरेश ने कहा कि दूध के जरिए आय बढ़ाने का रास्ता सबसे अच्छा है। सरकार को गांव-गांव डेरी खोलने के साथ ही पशुपालकों को दुधारू पशुओं के पालन के लिए सहायता दी जानी चाहिए।
बन रही है कार्ययोजना
समितियों का पुनर्गठन एवं बंद सेंटर चालू कराने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। संसाधनों की कमी और दूग्ध भुगतान में देरी के कारण दिक्कतें आ रही हैं।
- अशोक त्रिपाठी, यूनिट प्रबंधक
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