हरदोई। भरखनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आमतारा में मनरेगा के तहत दो लाख रुपये के एस्टीमेट पर तीन लाख चालीस हजार रुपये का भुगतान किए जाने के मामले में मनरेगा उपायुक्त ने ग्राम्य विकास अभिकरण के अवर अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अवर अभियंता के जवाब से मनरेगा के तहत भरखनी विकास खंड के अलग अलग गांवों में कराए जाने वाले कार्यों की पोल खोलकर रख दी है।
खास बात यह है कि जिसे मार्ग/सड़क दिखाकर कार्य कराया गया, वास्तव में वहां चकमार्ग है ही नहीं, यहां नहर पटरी है। अवर अभियंता के जवाब के बाद मनरेगा के जिम्मेदारों में भी खलबली मची है।
12 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने दो लाख रुपये के एस्टीमेट पर 3.40 लाख का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। सीडीओ आकांक्षा राना ने खबर को संज्ञान में लेते हुए मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। लगभग 25 दिन बाद मनरेगा उपायुक्त ने जांच रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी। रिपोर्ट के मुताबिक शंभू रतन के खेत से पूरब पुलिया तक भूमि विकास कार्य 11 जून से शुरू होकर आठ जुलाई तक हुआ और इसका भुगतान किया गया है। कार्य के जारी होने का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।
उक्त गड़बड़ी के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के भरखनी के अवर अभियंता दीपक राजपूत को जिम्मेदार माना गया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक तकनीकी सहायक हरिओम सिंह ने उक्त कार्य का दो जून को एस्टीमेट तीन लाख 66 हजार 85 रुपये का बनाया था। रिपोर्ट के मुताबिक अवर अभियंता दीपक राजपूत ने मौके पर जाए किए बिना ही 1,53,688 रुपये कम करके 2,02,126 रुपये की तकनीकी स्वीकृति दी गई।
मनेरगा उपायुक्त ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि मौके पर इतने धन से कार्य हो पाना संभव नहीं था, इसलिए सात अगस्त को पुनरीक्षित आगणन पेश कर तकनीकी स्वीकृति दी गई। अवर अभियंता को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
...और स्पष्टीकरण में जेई ने खोल दिए खेल
नोटिस मिलते ही ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता दीपक राजपूत ने जवाब भी मनरेगा के जिम्मेदारों को भेज दिया। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक स्पष्टीकरण के जरिए अवर अभियंता ने मनरेगा के तहत विभिन्न विकास खंडों में चल रहे खेलों का खुलासा कर दिया। स्पष्टीकरण के मुताबिक मौके पर वास्तव में न तो काम हुआ, न काम की आवश्यकता थी। शंभूरतन के खेत से पूरब पुलिया तक भूमि विकास कार्य से जो आगणन बनाया गया, वास्तव में वहां चकमार्ग है ही नहीं। यहां नहर पटरी है। छह माह पहले ही सिल्ट सफाई हुई थी और नहर से निकली मिट्टी ही उक्त कार्य के लिए पर्याप्त थी। 3,66,085 रुपये का एस्टीमेट बनाया गया था, लेकिन मौके की स्थिति देखकर इसे संशोधित कर 2,02,126 रुपये कर दिया गया था। बीडीओ ने भी इसी को प्रशासनिक स्वीकृति दी थी, लेकिन भुगतान ज्यादा कर दिया। अमर उजाला में खबर छपी, तो बीडीओ ने लीपापोती शुरू कर दी। जिस कार्य पर आठ अगस्त तक ही 3,45,000 रुपये का भुगतान हो चुका था, उसका संशोधित आगणन बन ही नहीं सकता। आगणन बनने के बाद ही भुगतान किए जाने का नियम है। साथ ही पूर्ण हो चुके कार्य को भी ऑनगोइंग यानी जारी दिखाया जा रहा है।