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अबकी गर्मी में जब ढूंढेंगे जल, तो सूखे मिलेंगे नल

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हरदोई। बढ़ते तापमान के साथ जल संकट के दिन वापस लौट रहे हैं। मौसम का पारा चढ़ता जा रहा है, लेकिन अभी तक विभागीय तैयारियां शुरू भी नहीं हो सकी हैं।
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ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी जल प्रबंधन सूखा है। ज्यादातर सरकारी नल खराब हैं। कई हैंडपंपों की मशीन, पाइप व अन्य उपकरण भी उखाड़ लिए गए हैं।
बताया जाता है कि देखरेख के अभाव में जल निगम की संपत्ति को काफी क्षति पहुंची है। इसके अलावा प्यास बुझाने वाली अमृत योजना को सभी घरों में पहुंचाया नहीं जा सका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ एक हैंडपंप पानी उगल भी रहे हैं, जो पीने योग्य नहीं है। दूषित जल पीने से बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। बढ़ती गर्मी के साथ इनकी उपयोगिता भी बढ़ेगी, लेकिन विभाग कील-कांटे दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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लिहाजा, चिलचिलाती गर्मी में जब सूखते हलक को पानी की तलाश होगी, तब नल खुद प्यासे मिलेंगे।
लोगों को आशंका है कि अगर जल्द विभागीय अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो अबकी गर्मी में लोग पीने के पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को विवश होंगे। इसके बावजूद भी उनको पानी मयस्सर होने में काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ेगा।
केस-एक
महिला चिकित्सालय में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने के बाद उसकी बोरिंग से वाटर पंप लगाकर अस्पताल प्रशासन अब विभागीय कार्यों में जल का इस्तेमाल कर रहा है।
लिहाजा, अस्पताल में आने वाले मरीज व उनके तीमारदारों की सेवा में इस नल ने ताजा जल उपलब्ध कराना बंद कर दिया है।
केस-दो
शहर के मौनी बाबा मंदिर तिराहे पर लगा नल पिछली गर्मी मेंहर रोज दर्जनों लोगों की प्यास बुझाता था। तिराहे के पास जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान स् ि
थत है। यहां सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल भी इस तिराहे से काफी नजदीक है। शहर से रेलवे स्टेशन तक जाने के दोनों मुख्य रास्ते इसी तिराहे से होकर गुजरते हैं।
केस-तीन
नुमाइश चौराहा, सिनेमा चौराहा, डीएम चौराहा, मौनी बाबा मंदिर तिराहा के केंद्र में सोल्जर बोर्ड चौराहा स्थित है, इसलिए यहां से गुजरने वाले राहगीरों की संख्या बहुत ज्यादा होती है।
इसके अलावा सोल्जर बोर्ड का कार्यालय भी इसी चौराहे पर स्थापित है। इस नल की उपयोगिता गर्मियों में काफी बढ़ जाती है, लेकिन यह नल खराब पड़ा है।
केस-चार
शहर की जेल रोड पर बने जिला कारागार के सामने का नल भी खराब हो चुका है। जेल में निरुद्ध बंदियों के परिजन उनसे मिलने दर्जनों की संख्या में आते रहते हैं।
मिलाई के समय काफी समय परिजनों को जेल के बाहर बिताना पड़ता है। ऐसे में यह नल उनके सूखते हलक को तर करने का काम करता है, लेकिन फिलहाल खराब पड़ा है।
केस-पांच
शहर की आवास विकास कालोनी के डी ब्लॉक में एक सरकारी नल का उपयोग निजी हो गया है। कालोनी के लोगों का कहना है कि यह नल काफी समय तक खराब रहा।
संभवतया वाटर लेबल कम होने की वजह से पानी नहीं निकल रहा था। इसके बाद कालोनी के एक परिवार ने इसकी बोरिंग में सबमर्सिबल लगाकर इसका निजी इस्तेमाल शुरू कर दिया।
बोतल बंद पानी ही विकल्प
लंबे समय से रिपेयरिंग न होने से सूख चुके नलों के बाद राहगीरों के पास केवल बोतल और पॉलिथीन वाला पानी ही विकल्प बचा है।
शहर के अस्पताल चौराहा निवासी अजय, सिनेमा चौराहा निवासी नितिन, मोमिनाबाद मोहल्ले के निवासी मोहम्मद खालिद और सरकुलर रोड निवासी सूरज ने बताया कि उनके घरों के आसपास लगे सभी हैंडपंप काफी समय से खराब हैं।
बताया कि लोग दुकानों से बॉटल और पॉलिथीन वाला पानी खरीदकर प्यास बुझाते हैं।
अस्पताल का नल उगल रहा बीमारियां
कछौना। कस्बे समेत ग्रामीण इलाकों में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप अधिकांश खराब पड़े हैं। अधिकांश हैंडपंप में दूषित जल निकल रहा है। कहीं, कुछ हैंडपंप बिल्कुल सूखे हैं।
कस्बे के सीएचसी परिसर चार हैंडपंप लगे हुए हैं। इनमें से तीन हैंडपंप खराब हैं। इलाज कराने आने वाले मरीज व तीमारदार इसी दूषित पानी का सेवन कर रहे हैं।
समाजसेवी ओपी राठौर ने बताया कि परिसर के अंदर लगे हैंडपंप अधिकांश खराब पड़े हैं। किसी की फर्श टूटी है तो किसी में दूषित जल निकल रहा है। गर्मी शुरू होने से पहले यदि इन नलों को सही किए नहीं किया गया तो पीने के पानी का संकट हो जाएगा।
नगर के अनूप सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर के अलावा अस्पताल के गेट पर लगा हैंडपंप भी खराब है। आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि नगर क्षेत्र के ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं।
जगह-जगह पानी का संकट रहता है। दुष्यंत सिंह ने बताया कि अस्पताल के मुख्य मार्ग के पास स्थित बाबा कुशीनाथ मंदिर पर लगा हैंडपंप भी खराब है। यहां पूजन के लिए आने वाले लोगों को ताजा व शुद्ध जल प्राप्त नहीं हो पाता है।
पतसेनी मोहल्ले के मे कपिल सिंह के घर के पास भी हैंडपंप खराब पड़ा है। यही स्थिति स्टेशन के आसपास की भी है जहां पर कई हैंडपंप खराब पड़े हैं।
80 फीसदी से ज्यादा नल खराब
सांडी। ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में सरकारी नलों की स्थिति काफी दयनीय है। 80 फीसदी से ज्यादा नल खराब पड़े हैं।
ब्लॉक के ग्राम दस्योली, बैठापुर, उमरौली, हैदर, महितापुर, तेरापुरसौली, छोछपुर, कुचिला विजना, श्रीमऊ, कर्ता, गुर्रा, बेहदर, नंदना, मगरौरा में लगे लगभग सभी नल खराब हैं। ज्यादातर पानी नहीं दे रहे और कुछ दूषित पानी उगल रहे हैं। कस्बे के 62 नल खराब हैं।
रिबोर करने के लिए भेजी गई रिपोर्ट
संडीला। नगर पालिका क्षेत्र में 605 इंडियामार्का हैंडपंप लगे हैं, जिसमें 22 रिबोर होने हैं। जल निगम के जेई सुनील कुमार के मुताबिक, रिपोर्ट चुनाव से पहले ही भेजी जा चुकी है।
विभाग के अग्रिम निर्देशों के आधार पर कार्य किया जाएगा। कोशिश है कि गर्मी बढ़ने से पहले ज्यादातर नलों को दुरुस्त कराया जा सके।
दूषित पानी उगल रहा सीएचसी का नल
सवायजपुर। सीएचसी का नल दूषित पानी उगल रहा है। पानी में गंदगी से दुर्गंध फैलती है। अस्पताल आने वाले मरीज और उनके तीमारदार इसके पानी का सेवन करने से बचते हैं, लेकिन बहुत मजबूरी में कई बार उन्हें इसी पानी को हलक से उतारना पड़ता है।
इसके अलावा सवायजपुर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन के बेहद बुरे हालात हैं। 70 फीसदी से ज्यादा सरकारी नल सूखे पड़े हैं। कई हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं।
कम मरम्मत वाले हैंडपंप को पालिका तत्काल दुरुस्त करा देती है। जिनमें अधिक समस्या है या रिबोर होना है, तो उसकी मरम्मत शासन से पैसा आने पर कराई जाती है।
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- रवीशंकर शुक्ल, ईओ, नगर पालिका परिषद, हरदोई
हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर से संबंधित कार्य ग्रामसभाओं की कार्य योजना में शामिल होता है। जहां भी खराब हैंडपंप होगा, उसे ग्रामसभा स्तर पर ही ठीक करा लिया जाता है।
- गिरीश चंद्र, जिला पंचायत राज अधिकारी, हरदोई
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