मल्लावां। आजादी से लेकर अब तक बाबटमऊ-इसरापुर मार्ग पर डामरीकरण नहीं हो सका, जिससे राहगीरों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने इस मार्ग पर डामरीकरण कराने की मांग की है।
क्षेत्र के इसरापुर-बाबटमऊ की दूरी करीब दो किमी है। सड़क का डामरीकरण नहीं कराया गया, जिससे बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बरसात में इन गड्ढों में जलभराव से साइकिल व बाइक सवारों को निकलने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
लोगों को एक-दूसरे के गांव सड़क मार्ग से जाने में करीब सात किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इस मार्ग से पाटाकोला, नोनारी, बिहार, काल्हामऊ, हर्रैया, बाबटमऊ समेत अन्य गांवों के लोगों का आवागमन रहता है।
करीब 50 हजार की आबादी परेशान है। इसरापुर के अमित सिंह चंदेल ने बताया कि बरसात में कच्ची सड़क पर जलभराव से बाबटमऊ समेत अन्य गांवों को जाने के लिए रमपुरवा, तेरवाकुल्ली होकर जाना पड़ता है।
अतिरिक्त सात किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। रामकृष्ण ने बताया कि सड़क के निर्माण को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, पर सुनवाई नहीं हुई।
बताया कि इसरापुर गांव में एक इंटर कालेज, सीएचसी के अलावा बाजार लगती है। लाखन सिंह ने बताया कि कई गांवों को जोड़ने वाला यह मुख्यमार्ग माना जाता है।
इन गांवों की करीब 20 हजार की आबादी को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डामरीकरण की मांग की है। प्रधानपति शिवमोहन राठौर ने बताया कि इस सड़क के डामरीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को लिखितपत्र दिया गया है।