गढ़ रोड फाटक पर फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू होने के बाद से मिनी बाईपास के रूप में प्रयोग हो रही जरोठी रोड से पीर तक की करीब एक किलोमीटर सड़क में काफी गहरे गड्ढे बने हैं। गड्ढा युक्त यह सड़क मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के दावों-निर्देशों की पोल खोल रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद निर्देश जारी किए थे कि 15 जून तक प्रदेश की तमाम सड़कें गड्ढा मुक्त कर दी जाएं। इसके लिए अच्छा खासा बजट भी दिया गया था।
आश्चर्य की बात यह है कि दो दिन पहले लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर सदन लाल गुप्ता ने दावा किया था कि जिले में विभाग ने अपनी 95 प्रतिशत सड़कों को गड्ढा मुक्त करा दिया है।
अमर उजाला की टीम बुधवार को गढ़ रोड पर निकली तो पीर के पास से जरोठी रोड तक जाने वाली सड़क कुछ नयी बनी दिखी। इस सड़क पर कुछ ही दूर चलने के बाद पता चला कि करीब 50 मीटर सड़क बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई थी।
जबकि करीब एक किलोमीटर सड़क पर कहीं भी तारकोल बजरी नहीं पड़ी थी। पूरी सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे थे और सड़क उखड़ गई थी। उल्लेखनीय है कि गढ़ रोड फाटक पर फ्लाई ओवर का निर्माण चलने के कारण फाटक को बंद कर स्वर्ग आश्रम रोड से होते हुए
दोयमी फ्लाई ओवर के नीचे से वाहनों को निकालकर गढ़ रोड़ की ओर भेज दिया जाता है। दोयमी फाटक से जरोठी रोड करीब एक किमी है जबकि जरोठी रोड से गढ़ रोड पीर तक की दूरी भी करीब एक किमी है।
जिलाधिकारी रहे अनिल ढींगरा के आदेश पर एचपीडीए ने दोयमी फाटक से जरौठी रोड तक की जर्जर सड़क फिर से बनवा दी थी, लेकिन जरौठी रोड से गढ रोड पीर तक की सड़क सिर्फ इसलिए नही बनी कि वह लोक निर्माण विभाग की है।
मजबूरी में इस खस्ताहाल सड़क से होकर आज भी भारी संख्या में वाहन निकल रहे हैं लेकिन पांच मिनट का रास्ता तय करने में आधा घंटा लग जाता है और आए दिन भारी वाहनों के एक्सल टूटते रहते हैं।
लोक निर्माण विभाग की इस कार्रवाई के बारे में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रजनीश राय से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मिनी बाईपास के रूप में प्रयोग हो रही सड़क को गड्ढा मुक्त नहीं किया जाना गंभीर मामला है।
वह इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब कर मामले की जांच कराएंगे। जिस स्तर पर लापरवाही हुई होगी, सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जरोठी रोड पर ही एक संस्थान में काम करने वाले मोहित कुमार का कहना है कि बरसात होते ही इस सड़क पर बाइक लेकर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार नागरिकों ने शिकायत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
जरोठी निवासी बचन सिंह का कहना है कि वह काफी समय से इस सड़क को जर्जर हालत में देख रहे हैं। परिणामस्वरूप वाहनों का निकलना काफी मुश्किल रहता है। उम्मीद थी कि योगी शासन में 15 जून तक यह सड़क बन जाएगी, लेकिन इस बार भी नंबर नहीं आया।
जरोठी रोड स्थित इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट में काम करने वाले प्रमोद कुमार का कहना है कि इस सड़क के जर्जर होने से आए दिन माल से लदे वाहन पलटते रहते हैं। इससे कई बार जाम भी लग जाता है। सड़क पिछले दो तीन साल से जर्जर है।