अत्यधिक जलदोहन से सेमी क्रिटिकल जोन में पहुंचा धौलाना ब्लॉक
हापुड़। जिले के भूगर्भीय जल की हालत में सुधार नहीं हुआ है। धौलाना ब्लॉक जो दूसरों से बेहतर स्थिति में था, वह भी सेमी क्रिटिकल जोन में पहुंच गया है। पिछले पांच वर्ष में हापुड़ ब्लॉक का जलस्तर सबसे अधिक 4.25 मीटर, सिंभावली का 3.72 मीटर, गढ़ का 3.26 मीटर और धौलाना का 1.24 मीटर तक गिर चुका है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में हापुड़, सिंभावली और गढ़ ब्लॉक में जलस्तर तेजी से गिरा है। पिछले एक साल में पानी की जलस्तर जिले के सभी ब्लॉकों में करीब तीन फिट तक गिर चुका है। गंभीर बात है कि अभी तक सेफ जोन में चल रहे ब्लॉक धौलाना की भी स्थिति ठीक नहीं है। यह ब्लॉक सेमी क्रिटिकल जोन में चला गया है। सेमी क्रिटिकल जोन का मतलब है कि इस ब्लॉक में दोहन संरक्षण के सापेक्ष स्तर से अधिक होना शुरू हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस ब्लॉक की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
वर्ष 2013 से डार्क जोन में हैं तीन ब्लॉक
सबसे पहले हापुड़ और इसके बाद गढ़मुक्तेश्वर व सिंभावली ब्लॉक भी वर्ष 2013 में डार्क जाने में चले गए। जिले में जलस्तर को लेकर किए गए सरकारी सर्वे बेहद आश्चर्यजनक हैं। पिछले 20 वर्ष में जिले का औसत जलस्तर 100 फीट नीचे खिसका है। इतना ही नहीं पीने योग्य पानी डेढ़ सौ फीट नीचे है। इससे ऊपर लगे हैंडपंप व अन्य साधन से मिलने वाला पानी पीने के काबिल नहीं हैं।
जिले में जलस्तर की वर्तमान स्थिति
वर्ष 1998 में हापुड़ जिले का औसत जलस्तर 35 फीट पर था। वर्ष 2003 में यह 49 फीट पर पहुंच गया। इसके बाद से यह लगातार नीचे खिसक रहा है। 2008 में यह 80 फीट पर पहुंच गया और अब करीब वर्षों में जिले का जलस्तर करीब 100 फीट तक नीचे गिर गया है। वर्ष 2020 और 21 के अंतर की बात करें तो हापुड़ और सिंभावली का जलस्तर अधिक नीचे गया है।
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हापुड़ जिले के तीन ब्लॉक पिछले लंबे समय से डार्क जोन में बने हुए हैं। धौलाना ब्लॉक का भी इस दिशा में अग्रसर होना गंभीर है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में जलस्तर में सुधार होने पर स्थिति बेहतर भी नजर आ रही है। लोगों को चाहिए कि अत्यधिक दोहन न करें। -नौरतन कमल, सहायक भूभैतिकविद, भूगर्भ विभाग खंड मेरठ
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प्रयासों को देना होगा बढ़ावा
वरिष्ठ भूभैतिकविद आदित्यकुमार पांडेय का कहना है कि इस दिशा में लोगों को प्रयास तेज करने होंगे। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम केवल सरकारी भवनों में हैं और साफ सफाई कर बेहतर स्थिति करनी होगी। बरसात के दिनों में घरों में सोखते बनाए जा सकते हैं। अत्यधिक जल दोहन से परहेज करना होगा।
तालाबों पर करना होगा काम
राज्य अभिलेखों के अनुसार जिले में कुल 1140 तालाब हैं। इनमें से करीब 450 का जीर्णोद्धार हो चुका है। इन पर कब्जे और तालाबों का सूखा होना एक अलग समस्या है। अब सरकार अमृत सरोवर योजना पर काम कर रही है। 75 गांवों को इसके लिए चिन्हित किया गया है। इन गांवों में गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।