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20 फीसदी कम पानी पर भी लहलहाएगी धान की फसल -कृषि विभाग के राजकीय बीज भंडारों पर पहुंचा बीच

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20 फीसदी कम पानी पर भी लहलहाएंगी धान की फसल
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हापुड़। भीषण गर्मी में गिरता भूगर्भ जलस्तर अब धान की फसल पर संकट नहीं बनेगा। कृषि विभाग को दो प्रजातियों का पूसा बासमती धान की बीज आवंटित हुआ है, जो 20 फीसदी कम पानी पर भी लहलहाएगी। महज 135 दिन में यह फसल पककर तैयार हो जाएगी, किसानों को 26 रुपये/किलोग्राम की दर से अनुदान भी मुहैया कराया जाएगा।
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इसकी बुवाई का सही समय 14 मई से 20 जून तक माना जाता है। जिले का भूगर्भ जलस्तर काफी तेजी से गिर रहा है, तीन ब्लॉक डार्कजोन घोषित किए गए हैं। ऐसे में धान जैसी फसल को उगाना काफी मुश्किल है।
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कृषि विभाग ने विषम परिस्थिति में भी तैयार होने वाले धान के उन्नतिशील बीज मंगाए हैं, जिनका आवंटन राजकीय बीज भंडारों पर किया है। विभाग को पीबी-178 का 73.92 क्विंटल, पीबी-1509 का 209.52 क्विंटल बीज आवंटित हो गया है।
जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पीबी-1718 प्रजाति के धान के बीज की प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक है, आसानी से इसमें रोग नहीं लगते। इस प्रजाति को तैयार होने में अन्य प्रजातियों के धान से 20 फीसदी कम पानी की आवश्यकता होती है। इसमें टिलरिंग अधिक होती है, साथ ही 135 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है। इसकी ऊपज 20 से 25 क्विंटल/एकड़ है, बुवाई का उपयुक्त समय 14 मई से 20 जून तक है।
वहीं, पीबी-1509 प्रजाति किसानों की पसंदीदा प्रजाति रही है। इसका बीज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। दोनों ही प्रजातियों का बीज किसानों को 54.95 रुपये/किलोग्राम के हिसाब से मिलेगा। इस पर डीबीटी के माध्यम से 26 रुपये/किलोग्राम की दर से अनुदान भी दिया जाएगा।
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कोट-
किसान धान का बीज प्राप्त करने के लिए राजकीय बीज भंडारों पर संपर्क कर सकते हैं। यहां आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति देकर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बीज प्राप्त कर सकते हैं। - मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
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