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चार माह में 56 अवैध कॉलोनियां ध्वस्त, 120 और पर चलेगा बुलडोजर

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चार माह में 56 अवैध कॉलोनियां ध्वस्त, 120 और पर चलेगा बुलडोजर
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हापुड़। जिले में अवैध कॉलोनियों पर एचपीडीए ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले चार माह में जिले भर की 56 अवैध कालोनियों को ध्वस्त किए हैं और 23 अवैध निर्माण को सील किया गया है। वहीं अब 120 अवैध कॉलोनियों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया है। कार्रवाई के दौरान 3.53 करोड़ रुपये का शमन शुल्क भी वसूला गया है।
पिछले कुछ वर्षों में रीयल एस्टेट में मंदी के बाद अब इस क्षेत्र में बूम आ रहा है। ऐसे में जिले में अवैध कॉलोनियां भी बड़े पैमाने पर काटी जा रही हैं। शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। नगर क्षेत्र में मेरठ रोड आवास विकास के अलावा मोदीनगर रोड पर जसरूपनगर, दस्तोई, मीनाक्षी रोड, बुलंदशहर रोड, किठौर रोड, बाबूगढ़ क्षेत्र के आसपास सैकड़ों की संख्या में कालोनियां हैं। शासन की सख्ती के बाद सभी जिलों में अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू हो गई है। ऐसे में एचपीडीए ने भी अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
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अधिकारियों की अनदेखी से हुए अवैध निर्माण
अधिकारियों की अनदेखी से अवैध निर्माण होते रहे और कई मंजिला इमारतें खड़ी हो गईं। नगर क्षेत्र के अलावा आवास विकास में तीन मंजिला कई भवन और दर्जनों दुकानें न सिर्फ बनी हैं, बल्कि इन्हें बेचकर और किराये पर उठाकर अच्छा खासा मुनाफा भी कमाया है। इस बीच हुई शिकायतों को भी अनदेखा कर दिया गया है। लेकिन शासन की सख्ती के बाद अब प्राधिकरण ने कार्रवाई की है। हालांकि इसमें खानापूर्ति के भी आरोप लग रहे हैं।
शासन के आदेश के बाद शुरू हुआ था अभियान-
अवैध निर्माण पर शासन के सख्त रुख के बाद से हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई जारी है। जनवरी माह से अवैध कालोनियों को चिन्हित किया गया था। इनमें से 56 कॉलोनियों को ध्वस्त व 23 निर्माण को सील किया गया है। 120 कॉलोनी और 160 अवैध निर्माण कार्रवाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। प्राधिकरण ने इस दौरान 3.53 करोड़ का शमन शुल्क वसूला है और 25 शमन स्वीकृत किए हैं। जबकि मात्र एक ले आउट स्वीकृत किया है।
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कोट-
प्राधिकरण की उपाध्यक्ष अर्चना वर्मा ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई पर वह खुद नजर बनाए हुए हैं। कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण में खानापूर्ति न हो, इसके लिए बाहर की एजेंसियों को ठेका दिया जाएगा। इन एजेंसियों द्वारा अवैध निर्माण और कालोनियों को पूरी तरह से ही ध्वस्त किया जाएगा, ताकि इन्हें दोबारा से आसानी से विकसित न किया जा सके।
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