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हापुड़ सीट पर त्रिकोणीय घमासान, प्रत्याशियों को झोंकनी होगी ताकत

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हापुड़ सीट पर त्रिकोणीय घमासान, प्रत्याशियों को झोंकनी होगी ताकत
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हापुड़। सदर विधानसभा सीट से मुख्य दलों से पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा की जा चुकी है। इस सीट पर मुख्य दल भाजपा, रालोद सपा गठबंधन और बसपा से मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं, ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने जा रहा है।
सदर सीट से भाजपा से विजयपाल आढ़ती के अलावा रालोद सपा गठबंधन से गजराज सिंह व बसपा से मनीष सिंह उर्फ मोनू चुनाव मैदान में हैं। तीनों ही प्रत्याशियों की स्थिति को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी का जनाधार कम है। अलग-अलग वर्गों में सभी की अलग अलग पकड़ है। भाजपा के प्रत्याशी विजयपाल आढ़ती निवर्तमान विधायक हैं, इस बार भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। रालोद-सपा व प्रसपा गठबंधन से प्रत्याशी गजराज सिंह कांग्रेस से चार बार विधायक रहे हैं। वहीं बसपा से मनीष सिंह पूर्व विधायक व चेयरमैन धर्मपाल सिंह के पुत्र हैं। पिछले नगर पालिका चुनाव में निर्विरोध लड़ने के बाद भी कुछ ही वोटों से हारे थे। ऐसे में तीनों ही प्रत्याशी हापुड़ सीट पर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। हापुड़ में किसी भी दल को कमजोर नहीं कहा जा सकता, ऐसे में इस सीट पर रोचक घमासान होने की उम्मीद जताई जा रही है। तीनों टिकट जारी होने के समर्थकों में खुशी की लहर है और तीनों ही अपने अपने प्रत्याशी की जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन अभी चुनाव की शुरूआत है और अभी यहां इसके कई रंग देखने को मिलेंगे।
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गढ़ में गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा के बाद स्थिति होगी साफ
हापुड़। गढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है। लेकिन यहां पिछली कुछ योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका में रहने वाली सपा रालोद गठबंधन से टिकट नहीं हुआ है। यहां के समीकरण इस प्रत्याशी के चयन पर ही निर्भर करेंगे।
गढ़ में कांग्रेस की आभा चौधरी को प्रत्याशी घोषित किया जा चुका है, उनके पति मूल रूप से कनिया कल्याणपुर निवासी सचिन चौधरी पुराने कांग्रेसी हैं। जब भाजपा से घोषित प्रत्याशी हरेंद्र सिंह तेवतिया की स्थिति भी यहां ठीक है। चौधरी चरण सिंह के परिवार से ताल्लुक रखने का उन्हें फिलहाल लाभ मिल सकता है। इस सीट पर तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती जब तक कि सपा रालोद गठबंधन की ओर से टिकट की घोषणा नहीं होती। उम्मीद है कि यहां सपा से प्रत्याशी की घोषणा हो सकती है। माना जा रही है कि भाजपा और गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। हालांकि कांग्रेस की आभा चौधरी निर्णायक की भूमिका में आ सकती हैं।
धौलाना विधानसभा सीट-
मुस्लिम मतों का बिखराव तय करेगा हार जीत
हापुड़। धौलाना विधानसभा सीट पर कांग्रेस को छोड़कर सभी प्रमुख प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है। इस सीट पर बसपा से विधायक रहे असलम चौधरी की पिछले चुनाव में भाजपा के रमेश चंद तोमर से सीधी टक्कर रही थी। इस बार भी इसी प्रकार के समीकरण रहेंगे। लेकिन मुस्लिम मतों में बिखराव हार जीत तय करेगा।
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पिछले चुनाव में धौलाना विधानसभा सीट पर बसपा से चुनाव लड़ रहे असलम चौधरी ने भाजपा के रमेश चंद तोमर को हराया था। जबकि वर्तमान में भाजपा से टिकट पाने वाले धर्मेश तोमर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार धर्मेश तोमर भाजपा से मैदान में जबकि असलम चौधरी दल बदलकर सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। सपा से बसपा में आए वासिद प्रधान भी मैदान में हैं। ऐसे में समीकरण उलट गए हैं। धौलाना विधानसभा में करीब 1 लाख 30 लाख मुस्लिम वोटर हैं और करीब 90 हजार ठाकुर मतदाता हैं। वासिद प्रधान के मैदान में उतरने के बाद यहां मुस्लिम वोटों का बिखराव ही हार जीत तय करेगा। धर्मेश तोमर ने इस सीट पर 2012 में रिकार्ड मतों से जीत हासिल की थी। महत्वपूर्ण बात है कि असलम चौधरी को करीब दस हजार वोटों से हराया था। हालांकि अभी कांग्रेस के प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यहां कांग्रेस के प्रत्याशी का पूर्व में कुछ खास दबदबा न रहने के कारण सीधी टक्कर सपा और भाजपा में ही नजर आ रही है। दलित वोटों के साथ बसपा भी मैदान में कड़े मुकाबले में है।
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