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दस साल में आबादी बढ़ी 7.66 लाख, अस्पताल मिले सिर्फ दो

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दस साल में 7.66 लाख बढ़ी आबादी, अस्पताल मिले सिर्फ दो
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हापुड़।
जिले की आबादी दस साल में 7.66 लाख बढ़ गई है, लेकिन उस हिसाब से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं हो सका है। 21 लाख की आबादी को उपचार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में सिर्फ 200 बेड की ही व्यवस्था है। मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल एक भी नहीं है, चिकित्सकों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ा रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उस समय जिले की आबादी 13.38 लाख थी, हापुड़ को वर्ष 2011 में जिला घोषित किया गया था। इन दस सालों में जनसंख्या बढ़कर 21.04 लाख हो गई है। इस जनसंख्या के हिसाब से हापुड़ जिले में 800 बेड की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 200 बेड ही उपलब्ध हैं।
आबादी के हिसाब से जिले में 21 सामुदायिक केंद्रों की आवश्यकता है, मौजूदा समय में सिर्फ छह सीएचसी ही चालू हैं। 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जगह सिर्फ 8 ही चल रही हैं। जिले में 100 बेड के चार अस्पतालों की मानक के अनुसार आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में सिर्फ 100 बेड का एक ही जिला अस्पताल संचालित है, जो पांच साल बाद जैसे तैसे स्वास्थ्य विभाग को हेंडओवर तो हुआ है, लेकिन चिकित्सकों की कमी व पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण यहां ओपीडी सीएचसी से भी काफी कम है।
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अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी
जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दो राजकीय महिला चिकित्सालय हैं। इनमें दो नेत्र रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ और एक ही फिजिशियन तैनात हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों की अभी तक तैनाती नहीं है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी टोटा
जिले के सरकारी अस्पतालों में चेस्ट रोग विशेषज्ञ, यूरोलाजिस्ट, न्यूरो सर्जन, हृदय रोग विशेषज्ञ तक की तैनाती नहीं है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना भी कैसे की जा सकती है।
पीकू वार्ड में भी स्टाफ की किल्लत -
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है, पीकू वार्ड तैयार हैं। लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है। अब अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित कर ही, कोरोना के समय इलाज देने की तैयारियां की जा रही हैं।
-जिले की आबादी-
धौलाना विधानसभा क्षेत्र--761425
हापुड़ विधानसभा क्षेत्र---678929
गढ़ विधानसभा क्षेत्र----663975
कुल आबादी------2104329
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ये हैं अस्पताल के मानक-
* 30 लाख की जनसंख्या पर 600 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल।--जिले में एक भी नहीं।
* 05 लाख की आबादी पर 100 बेड का अस्पताल। जरूरत चार की, संचालित सिर्फ एक।
* 01 लाख आबादी पर 30 बेड का सीएचसी। जरूरत 21 की, संचालित सिर्फ छह।
इलाज के लिए इनकी जरूरत-
* एमआरआई जांच।
* आधुनिक ऑपरेशन थिएटर।
* सभी अस्पतालों में डॉक्टर।
* आधुनिक पैथोलॉजी लैब।
* आईसीयू सेंटर।
* कैंसर जांच की सुविधा।
* बर्न यूनिट, आईवीएफ सेंटर।
* ट्रांस प्लांट की सुविधा।
* संयुक्त अस्पताल में लिफ्ट।
* हड्डी से संबंधित किसी भी ऑपरेशन में इंप्लांट।
* डेंगू मरीजों के लिए जंबो पैक बनाने की मशीन।
* ह्दय के ऑपरेशन की सुविधा।
* ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू जांच की सुविधा।
* संयुक्त अस्पताल में ब्लड बैंक।
आवास विकास में बने अस्पताल
मेरठ रोड आवास विकास में लाखों की आबादी रहती है, लेकिन यहां एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। बुखार, नजला, जुकाम के इलाज के लिए भी निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस क्षेत्र में एक 30 बेड का अस्पताल जरूरत होना चाहिए।--प्रवीण त्यागी।--फोटो संख्या--29
लाखों ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित
कुचेसर रोड चौपला इलाके में लाखों ग्रामीण रहते हैं। लेकिन यहां सरकारी अस्पताल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक नहीं बैठते, मरीजों को काफी परेशानी होती है।--नेत्रपाल सिंह।--फोटो संख्या--30
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शासन को भेजेंगे प्रस्ताव
जिले में 100 बेड का आधुनिक जिला अस्पताल चालू हो गया है। सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे की सुविधा भी चालू है। कोविड जांच की लैब, समेत अन्य प्रयोगशालाएं भी चालू करायी गई हैं। जिन क्षेत्रों में अस्पतालों की कमी है, वहां के प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजे जाएंगे।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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