हमीरपुर। मुद्दा विहीन इस विधानसभा चुनाव में मतदाता वोटिंग के बाद तक चुप्पी साधे रहे। ईवीएम में किस प्रत्याशी के निशान वाला बटन दबाया, ये राज मतदाता होंठों पर दबाए घर चले गए। ज्यादातर ने इशारों में भी यह संकेत नहीं दिया कि किसको वोट दिया है। जातीय आधार पर मतदान होने के संकेत जरूर मिले। इस आधार पर ही सदर सीट पर त्रिकोणीय और राठ में सपा-बसपा में मुकाबले का अंदाजा लगाया जा रहा है।
विधानसभा चुनाव में जिले की दोनों सीटों पर मतदान के प्रति उत्साह देखा गया। सुबह से युवाओं के साथ महिलाएं और बुजुर्ग भी मतदाता पर्ची लेकर बूथों की ओर जाते दिखे। मतदान के बाद बूथों से निकले ज्यादातर मतदाता मौन ही रहे। उन्होंने इस बात का संकेत तक नहीं दिया कि किसको वोट डालकर आए हैं। इससे प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की धड़कने और बढ़ गई हैं। मतदान में जातीय समीकरणों के संकेत जरूर दिखे। जिन जातियों के प्रत्याशी थे, उन बिरादरी के ज्यादातर मतदाता गोलबंद दिखे।
बड़ागांव बूथ संख्या 142 में साढ़े पांच बजे तक 682 वोट पड़े थे। मतदाता बिंदा साहू से सवाल किया गया, तो वह मुस्कराते हुए साइड से निकल गए। कुछेछा बूथ संख्या 132 के मतदाता रामकिशोर निषाद ने भी पूछने पर मुस्कराते हुए कहा कि अपने को ही वोट करेंगे। पत्योरा के बूथ संख्या 145 में मतदान कर आए वृद्ध इस्पट्टर तिवारी ने कहा कि देशहित व जनहित में कड़े फैसले ले ऐसी सरकार बनानी है। कहा कि आज भी मतदाता जातिवाद में पड़कर अपने मताधिकार का सही प्रयोग नहीं करते हैं। जिससे पांच साल लोगों को पछतावे के अलावा कुछ नहीं मिलता है।
टिकरौली में राजकुमारी का पलड़ा रहा भारी
टिकरौली पूर्व विधायक अशोक सिंह चंदेल का पैत्रक गांव है। ग्रामीणों ने इस चुनाव में खुलकर समर्थन किया। इस बार उनकी पत्नी राजकुमारी चुनाव लड़ीं। इस चुनाव में भी टिकरौली, कारीमाटी, रिगना के ज्यादातर मतदाता राजकुमारी के समर्थन में दिखे। वृद्ध सियादुलारी ने कहा कि भाई जी हारे चाहे जीतें, वोट उन्हीं को देंगी, गरीबन के सुनाई वही करिहैं।