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खानकाह निजामी में हुआ आल इंडिया नातिया मुशायरा

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मौदहा के हुसैनगंज मोहल्ले में आयोजित कार्यक्रम में कलाम पेश करते शायर। - फोटो : HAMIRPUR
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मौदहा। ‘दोजख को हर तरह का गुनहगार चाहिए, जन्नत को मुस्तफा का वफादार चाहिए’। मुजाहेदुल इस्लाम मऊ ने जब यह शेर पेश किया तो चारों ओर वाह, वाह का शोर उठ गया। मौका था पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की यौम-ए-पैदायश के मौके पर मोहल्ला हुसैनगंज स्थित खानकाह निजामी में आल इंडिया नातिया मुशायरे का।
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सदारत हाजी इफ्तिखार अहमद व संचालन यावर मौधवी ने किया। मुशायरे का आगाज ताजउद्दीन ने कुरान की तिलावत से किया। इसके बाद पूरी रात नातिया कलाम पढ़े गए। ताबिश रेहान मऊ ने पढ़ा ‘कदम हो अरजे तैबा पर नजर हो सब्ज गुंबद पर-और ऐसे हाल में फिर मौत आ जाए तो अच्छा है’। फहीम हरदोई का ये शेर बहुत पसंद किया गया ‘जख्म जो दिल पर लगे हैं हिज्र आंका में फहीम-उन पे अब मरहम लगाने आइए तैबा चले’।
इरशाद कानपुरी ने पढ़ा नबी के जिक्र का होना अशद जरूरी है- नबी से पहले सनाय समद जरूरी है। ऽमसीह निजामी ने पढ़ा ऽ ऐसी तैबा से सबा लाई है अबकी खुशबू, जो हैं ऊशशाके नबी लेंगे गजब की खुशबू’। संचालन कर रहे यावर मौधवी ने पढ़ा ‘ये उनकी शान के उन पर खुदा दरूद पढ़े, पढ़ें फरिश्ते भी अर्शे उला दरूद पढ़े’। ताजउद्दीन निजामी का शेर था ‘कचकुलाही हुक्मरानी बादशाही सल्तनत- बोरिया जिस दम बिछा सब कुछ बदल कर रह गया’। मो.अहमद निजामी ने यूं पढ़ा ‘आमदे मोहम्मद है हर तरफ उजाला है, नूर फैलेगा हर सू कुफ्र छंटने वाला है’। काशिफ इस्लाम, मजहारूल हसन, नफीस फनकार मूबश्शिरा, इरम आदि ने अपने अपने कलाम पेश किए।
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