महोबा। कोई हाथ में छाता थामे तो कोई सिर के ऊपर पॉलिथीन लगा रहा। जिसके पास बारिश से बचाव का कोई साधन नहीं वह इस उम्मीद में पानी में भींगते हुए भी लाइन में लगा कि कृषि कार्य के लिए खाद मिले। यह नजारा था सोमवार को पचपहरा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति का।
खाद के लिए बारिश के बीच जद्दोजहद करने के बाद भी कई किसानों को लौटना पड़ा। खाद न मिलने से आक्रोशित किसानों ने समिति कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप लगाए। कहा कि खाद वितरण में अव्यवस्था से वह परेशान हैं।
पचपहरा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति में सोमवार को सुबह से हो रही बारिश के बावजूद सैकड़ों किसान खाद के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे। किसानों को डीएपी खाद के साथ नैनो यूरिया की बोतल लेने के लिए मजबूर किया गया। किसानों ने सोसायटी सचिव पर खाद कालाबाजारी का आरोप लगाया है।
किसान हरप्रसाद, विमल, सुरेंद्र, रोहित आदि का कहना है कि समिति के कर्मचारी उन्हें बेवजह लाइन में खड़ा रखते हैं और जब बारी आती है, तो हर दो बोरी डीएपी खाद के साथ 600 रुपये कीमत की नैनो यूरिया की एक बोतल जबरन दी जा रही है। आरोप है कि यदि कोई किसान नैनो यूरिया खरीदने से मना करता है, तो समिति सचिव उसे डीएपी खाद देने से साफ इंकार कर देता है।
पचपहरा के किसान मुकेश और सुगंध राजपूत आदि ने बताया कि उन्हें खेतों के लिए डीएपी खाद की जरूरत थी। इसलिए वह सुबह से लाइन में लगे हैं। बारिश में भीगते हुए भी वह खाद लेने की उम्मीद में खड़े रहे लेकिन खाद नहीं मिली। किसान जगतरानी, जितेंद्र, महेश आदि ने बताया कि पिछले एक माह से खाद पाने के लिए सोसायटी के चक्कर लगा रहे है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी एक बोरी खाद नहीं मिल पाती। टोकन वितरण के बाद भी खाद नहीं दी जाती।
गोदाम में भरपूर खाद होने के दावे हैं लेकिन बोआई के समय खाद नहीं मिल रही। बेमौसम बारिश से बोआई पिछड़ रही है। खाद की कमी सबसे अधिक परेशान कर रही है। सुबह से बारिश में लंबी लाइन लगने के बावजूद भी खाद नहीं मिली।