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अज्ञानता का अंधकार मिटाकर ज्ञान भरते हैं शिक्षक

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हमीरपुर। छात्रों के भविष्य निर्धारण में कुशल शिल्पी की भूमिका शिक्षक ही निभाते हैं। शिक्षकों को समाज का दर्पण कहा जाता है। शिक्षकों की दी गई शिक्षा ही देश का भविष्य निर्धारण करती है। शिक्षक उस माली की तरह हैं जो अपने बाग में विभिन्न प्रकार के फूलों को संजोकर रखता है।
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उन फूलों की महक की सभी तारीफ करते हैं। मगर फूलों को महक बिखेरने लायक बनाने वाले माली का त्याग कोई नहीं देखता। माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं तो शिक्षक उन्हें शिक्षा व संस्कार देकर आदर्श नागरिक बनाते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को गोविंद से बड़ा दर्जा दिया गया है।
राठ के सिकंदरपुरा निवासी भुवनेश तिवारी गल्हिया के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। विद्यालय को कान्वेंट स्कूलों से अच्छा बनाने में जुटे हैं। बच्चों को लैपटॉप व प्रोजेक्टर के माध्यम से शिक्षा देते हैं। विज्ञान व चित्र प्रदर्शनी के साथ ही पुस्तकालय बनाया है।
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राठ के महारानी लक्ष्मीबाई कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका नीलम कौशल छात्राओं को शिक्षा संग आत्मसम्मान की सीख देतीं हैं। छात्राओं में आत्मबल व स्वावलंबन उनकी प्राथमिकता में है। आर्थिक कमजोर बालिकाओं को विभिन्न सामाजिक संगठनों से मदद दिलातीं हैं।
परिषदीय विद्यालय में शिक्षक रहे औंता गांव के महेश त्रिपाठी ने शिक्षकों के हित में संघर्ष किया। बताते हैं उन्हें कभी किसी पद की लालसा नहीं रही। सेवानिवृत्त के बाद भी शिक्षक हित में काम कर रहे हैं। उनके पास उम्मीद लेकर आने वाले शिक्षक कभी निराश नहीं होते हैं।
राठ के दीवानपुरा निवासी शिरीषकांत कुटार डा. भीमराव आंबेडकर प्राथमिक विद्यालय कछवाकला में प्रधानाध्यापक हैं। प्रतिदिन 16 किमी का सफर साइकिल से तय करते हैं। संसाधनों के अभाव में भी समय से पहुंचते हैं। कहते हैं बच्चों का साथ व पढ़ाने पर सारी थकान दूर हो जाती है।
आचार्यों को दिए प्रतीक चिह्न
हमीरपुर। शहर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में शनिवार को शिक्षक दिवस मनाया गया। प्रधानाचार्य रामप्रकाश गुप्ता ने आचार्यों को बधाई व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। कहा शिक्षक का सही अर्थ शिक्षा, क्षमा, करुणा है। शिक्षक दिवस हमारे राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति दोनों ही पदों पर कार्यरत रहने वाले महापुरुष डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में मनाया जाता है। उनका जन्म पांच सितंबर 1888 को तमिलनाडु में हुआ था। आचार्य रमेश शुक्ल ने कहा आंध्र विश्व विद्यालय से आवासीय विश्वविद्यालय करने का श्रेय डा. सर्वपल्ली राधाकृणन को जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत संगीताचार्य ज्ञानेश जड़िया ने सरस्वती वंदना से किया। छात्र श्रेयांश, मयंक सोनी, आर्यन प्रताप व उत्कर्ष आदित्य, बहन अंजली और शिवांगी आदि ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन आचार्य बलराम सिंह व मीडिया प्रभारी आचार्य वेदप्रकाश शुक्ल ने किया। आभार ज्ञापन कार्यक्रम प्रमुख आचार्य मातादीन त्रिपाठी ने किया।
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