हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट रणवीर सिंह की अदालत ने 17 साल पुराने मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी के मुकदमे में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार साल की सजा सुनाई है।
मौदहा थाना क्षेत्र के ग्राम मवई खुर्द निवासी मथुरा प्रसाद ने 29 जनवरी 2009 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में याचिका दायर की थी। बताया था की 20 नवंबर 2008 को गांव के कपूर सिंह, इंद्रपाल सिंह ने खेत में जानवर घुसने के विवाद को लेकर उसके साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं।
21 नवंबर को थाने में सूचना तो दूसरे दिन पुलिस आई और पीड़ित पक्ष को ही फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। 23 नवंबर 2008 को बाजार जाते समय ज्ञान सिंह, रामलखन सिंह और शिवराज सिंह ने प्राथमिकी सूचना देने को लेकर उसे भला बुरा कहा। सभी ने घेरकर लाठी-डंडों और बेल्ट से पीटा तथा जान से मारने की धमकी दी।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट रणवीर सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने गवाहों के आधार पर पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषियों को वादी मुकदमा को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति राशि देने के भी निर्देश दिए हैं।
इन धाराओं में भी हुई सजा
अदालत ने एससी-एसटी एक्ट में चार वर्ष का सश्रम कारावास और चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 323/149 में प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 504 आईपीसी में दो वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 506 आईपीसी में दो वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी।