हमीरपुर। नक्शा दुरुस्ती वाद में रिश्वतखोरी का मामला अब और गहरा गया है। पूर्व सैनिक धर्मवीर सिंह ने रविवार को अपर मुख्य सचिव राजस्व विभाग को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आरोप लगाया है कि नक्शा दुरुस्ती वाद निस्तारण के लिए कई बार रिश्वत मांगी गई। इन्कार करने पर वाद खारिज करने की धमकी दी गई। एंटी करप्शन टीम एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है।
दो बार राष्ट्रपति से पुरस्कृत पूर्व सैनिक धर्मवीर सिंह का कहना है कि गाटा संख्या 1323 के बंदोबस्त नक्शे में त्रुटि थी जिसके सुधार के लिए वाद दायर किया गया था। न्यायालय के निर्देश पर चकबंदी विभाग की रिपोर्ट में भी नक्शे में त्रुटि पाई गई और दुरुस्ती संभव बताई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पहले पेशकार के माध्यम से और बाद में बाबू अल्ताफ ने सीधे रिश्वत मांगी। कहा कि पैसे देने पर रिपोर्ट के अनुसार नक्शा दुरुस्त कर दिया जाएगा। एंटीकरप्शन टीम ने बाबू अल्ताफ को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार भी किया था।
पूर्व सैनिक ने उठाए सवाल
पूर्व सैनिक का कहना है कि जब वाद पहले से फैसले के लिए सुरक्षित था तो 16 फरवरी 2026 की नई तारीख लगाना ही गलत था। दस्तावेजों में कोई गंभीर त्रुटि थी तो उसी समय आवेदन क्यों स्वीकार किया गया। बाद में उन्हीं दस्तावेजों को वाद निरस्त करने का आधार बनाया जाना अपने आप में पूरी कहानी बयां कर रहा है। पूर्व सैनिक ने पत्र में कहा है कि यदि वाद 24 मार्च 2026 को पूरी तरह समाप्त हो चुका था तो बाबू अल्ताफ किस काम के रुपये ले रहा था। वह किस अधिकार से कह रहा था कि पैसे पहुंच जाएंगे तो काम हो जाएगा।
साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराने की मांग
पूर्व सैनिक ने अपने पास मौजूद वीडियो रिकॉर्डिंग, विजिलेंस के सरकारी उपकरण में दर्ज ऑडियो, अभिलेख और अन्य दस्तावेजों का वैज्ञानिक परीक्षण कराने की मांग की है। कहा कि जांच केवल एक बाबू तक सीमित न रहकर मामले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया बाबू अकेला दोषी नहीं है। वह किसके इशारे पर पैसा ले रहा था यह जांच का विषय है। दूसरे विभाग का पेशकार होते हुए भी वह कनिष्ठ सहायक के रूप में एडीएम न्यायिक के दफ्तर में संबद्ध था।