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Hamirpur News: संचारी रोग नियंत्रण में जनपद फिसड्डी, जनपद को मिली 50वीं रैंक

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हमीरपुर। जिम्मेदारों की लापरवाही से संचारी रोग नियंत्रण में जिला फिसड्डी साबित हो रहा है। जनपद की 50वीं रैंक आ जाने से अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं। दरअसल, संचारी रोग नियंत्रण के लिए अभियान तो हर साल चलाए जाते हैं लेकिन उनका क्रियान्वयन होता कहीं दिखाई नहीं देता। वहीं, चित्रकूट धाम मंडल में बांदा की 62, चित्रकूट की 72 और महोबा की 23वीं रैंक आई है। जिले में अब तक 140 से ज्यादा डेंगू मरीज सामने आ चुके हैं।
बता दें कि हर वर्ष संचारी रोग अभियान चलाया जाता है। समय रहते बेहतर तैयारी की जाए तो इससे निपटा जा सकता है। इस बार भी अभियान की शुरुआत तो जोर-शोर से की गई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। बाद में अभियान भी ठंडा पड़ गया। डेंगू और मलेरिया की भयावह स्थिति भी अभियान की हकीकत बयां कर रही है। डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ने के कारण जिले की 50वीं रैंक आई है।
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संचारी रोग नियंत्रण की रैंक जिले भर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कामों के आधार पर शासन से तय की जाती है। उसमें शासन से निर्धारित मानकों को स्वास्थ्य विभाग कुछ हद तक पूरा करने में सफल रहा। लिहाजा जिले को 50वीं रैंक मिली।
इस दौरान डेंगू व मलेरिया के मरीज भी बड़े पैमाने पर सामने आए। विभाग की लापरवाही व सुस्त कार्यप्रणाली के चलते गांवों में गंदगी के ढेर लगे हैं। जलभराव देखने को मिल रहा है।

गंदगी बन रही बीमारी की वजह

दरअसल, देहात क्षेत्रों में फैली गंदगी ही बीमारियों का प्रमुख कारण है। जलभराव और कीचड़ के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं, जो डेंगू और मलेरिया का कारण बन रहे हैं। कई गांवों में सफाईकर्मी ही नहीं पहुंच रहे हैं। जब सफाईकर्मियों की जानकारी डीपीआरओ से की गई कि कौन सा कर्मी कहां तैनात है तो उन्होंने कहा कि जब तक संचारी अभियान चलेगा तब तक इसकी जानकारी नहीं दे सकेंगे। इस तरह से गांवों में फैली गंदगी पर जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं।
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मंडल के जनपदों की स्थिति
जनपद - रैंक
हमीरपुर- 50
महोबा- 23
बांदा- 62
चित्रकूट-72
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जिला मलेरिया अधिकारी आरके यादव ने बताया कि ग्रामीणों क्षेत्रों में गंदगी फैली है। पंचायतों में ठीक से सफाई न होने से मरीज सामने आ रहे हैं। गांवों में आंगनबाड़ी आशा के साथ घर-घर कम पहुंच रही हैं। जिससे रैंक खराब हुई है।
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सीएमओ डॉ.गीतम सिंह का कहना है कि गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा दस्तक अभियान के तहत न पहुंचने से कम अंक मिले थे। जिससे रैंक गडबड़ हो गई थी। पहले 74 थी अब सुधार हुआ है। बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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