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पातालेश्वर मंदिर के अतीत में छिपा है मराठाकालीन इतिहास

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हमीरपुर। यमुना नदी के किनारे स्थित पातालेश्वर शिवमंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। यह मंदिर मराठाकालीन है, जो बिना सरिया और सीमेंट का बना है। मान्यता है यमुना नदी के जल से मंदिर के पाताली शिव लिंग का जलाभिषेक करने से मन और शरीर को बड़ी शांति मिलती है। सावन मास के तीसरे सोमवार को पूरे शहर के लोगों ने मंदिर में विधिविधान से पूजा की। महामृत्युंजय जाप भी श्रद्धालु कर रहे हैं।
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शहर के मध्य यमुना नदी किनारे पूरब दिशा में एक प्राचीन शिवमंदिर है। इस मंदिर का इतिहास भी एक हजार साल से भी अधिक पुराना है। जिसके अतीत में कई राज छिपे हैं। जमीन से करीब पंद्रह फीट नीचे शिव लिंग विराजमान है। शिवलिंग के आसपास अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मंदिर मराठाकालीन है जो तमाम दैवी आपदाओं के बीच भी पूरी तरह सुरक्षित है।
स्थानीय लोगों ने बताया मंदिर में कोई भी पुजारी साल भर तक यहां नहीं रह सकता है। इस समय सेवाराम मंदिर में रहते हैं। सावन मास में दूर-दूर से संत भी मंदिर में आकर भक्ति रस की गंगा बहाते है। सावन मास के तीसरे सोमवार को यहां मंदिर में महामृत्युंजय जाप का आयोजन व मिट्टी के शिवलिंग बनाकर लोग विधिविधान से पूजा करते हैं। यहां रक्षाबंधन से एक दिन पहले रात में पतालेश्वर मंदिर में भजन-कीर्तन होगा, जिसकी तैयारी शुरू है।
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जमीन के अंदर स्थापित है शिवलिंग
बुजुर्ग सतीश तिवारी ने बताया ये मंदिर मराठाकालीन है। जिसमें स्थापित शिवलिंग का निचला हिस्सा जमीन में कई फीट अंदर तक है। कई दशक पहले जमीन से करीब पंद्रह फीट की गहराई से शिवलिंग को ऊपर स्थापित कराए जाने की बड़ी कोशिशें की गई थी, लेकिन शिवलिंग वह हिला तक नहीं। इसलिए शिवलिंग पतालेश्वर के नाम से विख्यात हो गया है। यमुना नदी के जल से अभिषेक करने पर मन की मुरादें जरूर पूरी होती है।
बाढ़ में डूबने के बाद भी मंदिर सुरक्षित
मंदिर के पास रहने वाले सहदेव, शशिशंकर त्रिपाठी व जगत प्रसाद मिश्रा ने बताया यह मंदिर बहुत ही अद्भुत है, जो वर्ष 1982, 1983, 1996 में यमुना और बेतवा के उफनाने से पूरी तरह से डूब गया था। पुजारी और संत लोगों ने जान बचाकर ऊंचाई वाले स्थान पर जाकर शरण ली थी। एक हफ्ते तक बाढ़ में मंदिर डूबा रहा, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंचा। मंदिर बाढ़ के बाद भी चमकता रहा। वैद्य दिलीप त्रिपाठी ने बताया पांच साल पूर्व मंदिर के पास बिजली गिरी थी। जिससे बिजली की केबल जल गई थी। लोगों के घरों में रखे टीवी, पंखे, इनवर्टर व अन्य विद्युत उपकरण फुंके थे। सुरेश मिश्रा ने कहा शिवलिंग के प्रभाव के कारण ही यहां आसपास कोई जनहानि नहीं हुई।
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