हमीरपुर। दहेज हत्या के मामले में बुधवार को अदालत ने सुनवाई करते हुए आरोपियों को दोषी पाया। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी फस्ट गीतांजलि गर्ग ने मामले में विवाहिता के पति, सास व ससुर को दस दस वर्ष की सजा सुनाते हुए दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मनीराम बुंदेला ने बताया बांदा शहर के परशुराम तालाब निवासी वादी अजीत कुशवाहा ने बताया उनकी बहन कमला देवी उर्फ गुड़िया की शादी 20 जून 2002 को मौदहा थानाक्षेत्र के सिलौली गांव में महेंद्र कुमार के साथ हुई थी। जिसमें उनके पिता वासुदेव ने अपनी सामर्थ के अनुसार दहेज दिया था। लेकिन ससुरालीजन दहेज से संतुष्ट नहीं थे। जिस पर पति महेंद्र, सास रामकली, ससुर निरंजन प्रसाद कुशवाहा, देवर सुरेंद्र व अरविंद व ननद प्रमोद कुमारी बहन को प्रताड़ित करने लगे। बहन से एक लाख रुपये व बाइक की मांग कर रहे थे।
पिता वासुदेव ने अप्रैल 2003 में बाइक के लिए 40 हजार रुपये दिए। इसके बाद फिर नौ मई 2004 को बहन के पति नौकरी में नियुक्ति पाने के लिए एक लाख रुपये की मांग करने पर बहन ने मायके आकर बड़ी बहन उर्मिला को बात बताई। इसके बाद उसका देवर उसे लेकर ससुराल चला गया। कुछ दिनों बाद मौसेरे भाई ओमप्रकाश ने फोन पर सूचना दी कि उनकी बहन जल गई है। उसे जिला अस्पताल से कानपुर रेफर किया गया है। जहां बहन की 16 मई 2004 को कानपुर में इलाज दौरान मौत हो गई। पीड़ित भाई ने घटना के दूसरे दिन एसपी को प्रार्थना पत्र दिया।
जिस पर ससुरालीजनों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज हुआ। जांच में पुलिस ने पति, ससुर व सास को आरोपी बना अदालत में विवेचना पेश की। मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी फस्ट गीतांजलि गर्ग ने आरोपियों पर दोष सिद्ध किया। अदालत ने पति, ससुर व सास को दस-दस वर्ष की सजा सुनाते हुए जुर्माना सुनाया है।