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मरम्मत संग जगमग होगा मौदहा बांध

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हमीरपुर। जिले में 22 साल पुराने मौदहा बांध का अब कायाकल्प होगा। इसके लिए 169.80 करोड़ रुपये की कार्य योजना पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। वहीं केंद्र सरकार की पांच सदस्यीय टीम के अलावा केंद्रीय बांध सुरक्षा के निदेशक के नेतृत्व में टीमें तकनीकी जांच भी कर चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही कि विस चुनाव से पहले बांध के कायाकल्प के कार्य शुरू हो सकता है। बांध की गैलरी में ही सौ करोड़ की धनराशि खर्च करने का प्रावधान रखा गया है।
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जिले में चालीस साल पहले सूखा पड़ा था, तब किसान इस दैवी आपदा से बुरी तरह बर्बाद हो गए थे। उस समय सिंचाई के साधन भी नहीं थे। हमीरपुर और महोबा के हजारों किसानों के लिए मौदहा बांध बनाए जाने का फैसला सरकार ने लिया था। वर्ष 1976-77 में मुस्करा क्षेत्र के बसौठ गांव के पास 117 करोड़ की लागत की मौदहा बांध की आधारशिला बेतवा की सहायक नदी विरमा में रखी गई थी। 17 जून 1999 को तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने बांध का लोकार्पण करते हुए इसका नाम स्वामी ब्रह्मानंद बांध रखा। बांध 3.48 किमी लंबा और 22 मीटर ऊंचा बनाया गया।
दो सौ मिलियन क्यूसेक मीटर (सात टीएमसी) की क्षमता का जलाशय भी बना है। डैम की तकनीकी जांच पूरी हो गई है। अब जल्द ही कार्य शुरू होंगे। बताया जाता है कि बांध की 1260 मीटर लंबी गैलरी में तकनीकी कमियां हैं। इसमें बाढ़ के दौरान पानी आता है। जो खतरे की घंटी है। इसलिए केंद्र से आई तकनीकी टीम ने गैलरी की मरम्मत कराने की सलाह दी है। मरम्मत में सौ करोड़ की धनराशि खर्च होगी, जबकि बांध की मरम्मत और चारों ओर लाइटिंग के कार्य होने हैं। इसके अलावा पिचिंग की मरम्मत की जाएगी, साथ ही एक पार्क भी बनाया जाएगा। (संवाद)
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बांध से 29.24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र होता सिंचित
बांध में 11 दर्रों की गैलरी निर्मित है, जिसकी क्षमता भी चार लाख क्यूसेक है। बाढ़ के दौरान फालतू पानी की इसी से निकासी होती है। इसके साथ ही 98 किमी मुख्य नहर व शाखाएं निकलीं हैं। वहीं 456 किमी बांध की वितरण प्रणाली भी है। जिससे 29.24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का पानी मिलता है। डैम से 28 लाख घन मीटर पानी भी पीने के लिए मिलता है। इसके अलावा दोनों जिलों के दर्जनों गांवों के किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी मिलता है।
बांध का कायाकल्प करने को कार्ययोजना तैयार की गई है। विश्व बैंक के जरिए 169.80 करोड़ की परियोजना पर केंद्र सरकार की मुहर लग चुकी है। भारत सरकार के निर्देश पर केंद्रीय बाढ़ सुरक्षा के विशेषज्ञ एस. मसूद हुसैन, भूगर्भ जलशास्त्री राकेश कुमार गुप्ता, बांध के डिजाइन विशेषज्ञ बृजेश त्रिपाठी, भूवैज्ञानिक दिनेश चंद्र त्रिपाठी व बांध सुरक्षा निदेशक श्याम चौबे आदि बांध की तकनीकी जांच कर चुके हैं। इस साल भी कई और टीमें बांध की जांच कर चुकी हैं।
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-करन पाल, अधिशासी अभियंता मौदहा बांध
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