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मिर्च की फसल से समृद्ध हुए धनौरी के किसान

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मुस्करा (हमीरपुर)। क्षेत्र का धनौरी गांव जिले में ही नहीं दूर-दूर तक मिर्च प्रसिद्धी पा चुका है। प्रसिद्धी के चलते लोग मिर्च वाला धनौरी गांव कहकर पुकारते हैं। परंपरागत पुराने बीज का ही किसान सदियों से उपयोग करते चले आ रहे हैं। इस मिर्च की चटपटाहट से हर कोई वाकिफ है। एक अर्से से गांव का हर किसान मुख्य फसल के रूप में तीन से लेकर 10 बीघे तक मिर्च की खेती कर अपनी आर्थिक स्थित मजबूत कर रहे हैं। धनौरी में हर वर्ग के किसान मिर्च की फसल कर रहे हैं। मिर्च उगाने वाले किसान आज भी कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित हैं।
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लेकिन तैयार फसल को बेचने के लिए आसपास की मंडियों में भटकना पड़ता है। इसलिए मुनाफा कम हो जाता है। कारण यह है कि किसान का माल किसी भी मंडी में समर्थन मूल्य के बिना ही सब्जी व्यापारी मनमाने दाम पर खरीदते हैं। इनका मुनाफा थोक व्यापारियों पर निर्भर रहता है। थोक व्यापारी मनमाने दाम पर मिर्च खरीद कर अचार, मसाला इत्यादि तैयार कर दोगुना मुनाफा हासिल करते हैं। धनौरी में मौजूदा समय में करीब 60 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर मिर्च की खेती किसानों ने की है।
किसान वृंदावन पाल ने बताया कई सालों से मिर्च की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। इसकी आमदनी से ढाई बीघा जमीन और खरीद ली है। साथ ही नया ट्रैक्टर भी ले लिया है। बताया इस समय दो बीघे में मिर्च की पौध तैयार हो गई है। वहीं पुराना मिर्च का देशी बीज है। कहते हैं कभी रासायनिक खाद नहीं डालते हैं। उनको मिर्च की खेती के लिए कभी किसी भी विभाग से प्रोत्साहन नहीं मिला है। मंडी में कई दिनों तक मेहनत कर माल बेचना पड़ता है।
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मिर्च की खेती बनी किसानों की शान
किसान बृजेंद्र राजपूत ने बताया उन्होंने 9 बीघा में मिर्च की पौध तैयार की है। जो प्रत्येक वर्ष की भांति अच्छी है। बताया बीते साल चार बीघे में हाइब्रिड बीज की मिर्च तैयार की। उस मिर्च में तीखापन नहीं आया। जिस कारण मंडी में अच्छा भाव नहीं मिला व उत्पादन भी देशी मिर्च के मुकाबले आधा रहा। बताया मिर्च की खेती से हुई कमाई आज उनके पास ट्रैक्टर सहित कृषि यंत्र हैं। मिर्च उनके गांव के किसानों की रीढ़ की हड्डी है। मिर्च धनौरी की शान है।
बुजुर्ग किसान संतराम राजपूत ने बताया उनके पिता भी मिर्च की खेती करते थे। वह भी 30 साल से मिर्च पैदा करते आ रहे हैं। बताया आज के मूल्य के हिसाब से एक बीघे में 50 से 55 हजार की मिर्च का उत्पादन हो जाता है। वह लोग मिर्च का पारंपरिक देसी बीज का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीज जैसा तीखापन हाईब्रिड बीज में नहीं होता है। मिर्च का लाल रंग इसे अनोखा बनाती है।
किसान अरविंद ने बताया वह मिर्च की खेती करना ज्यादा पसंद करते हैं। मिर्च की खेती में मुनाफा होना निश्चित है। क्योंकि वह लोग देसी मिर्च बीज का उपयोग करते हैं। जिसमें रोग बाधा न के बराबर है। तीखापन सातवें आसमान का है। जो एक बार चखे तो कई दिनों तक याद रखें। मिर्च का प्रयोग अचार के लिए होता है। मिर्च की खेती से हुए मुनाफे में खुद का ट्यूबवेल भी लगवा लिया है।
मसाले की खेती में प्याज व लहसुन पर ही शासन ने किसानों को मदद दी जा रही है। कभी प्रदर्शन पर मिर्च बीज आता है। अब तो विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे जा रहे हैं। किसान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाएं। -डा. रमेश पाठक, जिला उद्यान अधिकारी
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