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गाजर घास के दुष्प्रभाव की जानकारी दी

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हमीरपुर। एग्जिमा, बुुखार, दमा, एलर्जी व त्वचा संबंधी बीमारियों का प्रमुख कारण गाजर घास है। इसके प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को गाजर घास के दुष्प्रभाव व नियंत्रण की जानकारी दी जा रही है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. सरस कुमार तिवारी ने बताया गाजर घास यानी पार्थेनियम घास के प्रकोप से फसलों, सब्जियों व उद्यानों को काफी नुकसान होता है। यही नहीं इंसानों में बीमारी फैलने की वजह भी हैं। बताया गोष्ठी कर लोगों को गाजर घास के दुष्प्रभाव व नियंत्रण के बारे में जानकारी दी जाएगी। गाजर घास को फूल आने से पहले जड़ से उखाड़कर कंपोस्ट व वर्मी कंपोस्ट बनाया जा सकता है।
इसे रोकने के लिए ढैंचा, ज्वार, बाजरा, मक्का समेत शीघ्र बढ़ने वाली फसलें पैदा करनी चाहिए। घर के आसपास बगीचे, उद्यान क्षेेत्रों में गेंदे के पौधे उगाकर गाजर घास के फैलाव व वृद्धि को रोकने के लिए ग्लाइफोसेट 41 प्रति एसएल की एक लीटर मात्रा या मैट्रीब्यूजीन 70 प्रति डब्ल्यूवी की 500 ग्राम मात्रा को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। जैविक नियंत्रण के लिए मैनिराफन बीटल जाइगोग्राम बाइक्लोराटा नामक कीट को वर्षा में गाजर घास पर छोड़ने से भी यह नष्ट हो जाता है।
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