यूजीसी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की ओर से संचालित पर्यावरण शिक्षा के प्रथम पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई।
मंगलवार को ‘पर्यावरण शिक्षा: चिंतन और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम के समापन के मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. प्रभाशंकर पांडेय ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से अतीत की स्मृति जागृत हो जाती है। भारतवर्ष का दर्शन विभिन्न प्रांतों के प्रतिभागियों के कारण हो जाता है। उन्होंने कहा कि एक विश्वव्यापी समस्या के रूप में पर्यावरण को पर्यावरण शिक्षा के द्वारा समाधान करने की एक कोशिश है। प्रकृति पर मनुष्य का अत्याचार ही पर्यावरण समस्या के रूप सामने आया है। विश्व की समस्त संस्कृतियां बाजार संस्कृति (उपभोक्ता संस्कृति) से पिछड़ गई है। पर्यावरण क्षरण का सबसे बड़ा कारण है।
यूजीसी-ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक प्रो. कीर्ति पांडेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में सरिता त्रिपाठी, सुधाकर मिश्र, द्वारिका और भुआल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो. शिवाकांत सिंह आदि उपस्थित थे।