देवों के देव महादेव को समर्पित सावन महीने की शुरुआत बुधवार से हो रही है। सावन के स्वागत को लेकर भक्तों की तैयारी देखी जा सकती है। सोमवार को स्थान-स्थान पर भोलेनाथ के जयकारे की गूंज ने इस तैयारी का अहसास कराया। दरअसल यह जयकारा उन कांवरियों के उत्साह की बानगी थी, जिन्होंने हर हाल में सावन के पहले दिन झारखंड के बाबाधाम में जल चढ़ाने की जिद ठानी है।
रेलवे स्टेशन हो या बस स्टेशन, हर ओर केसरिया वस्त्र धारण किए कांवरिए मंजिल तक पहुंचने की धुन में नजर आने लगे हैं। शहर के विभिन्न चौराहे पर प्राइवेट बसों से भी जयकारे की गूंज सुनाई दी। ऐसा नहीं है कि इन कांवरियों में केवल पुरुष ही हैं, महिलाएं भी भोले बाबा के दरबार में दस्तक देने के लिए बेताब दिखीं। रुस्तमपुर चौराहे पर बाबाधाम जाने के लिए तैयार बस के कांवरिया सुभाष चौहान और बु्द्ध से जब यात्रा को लेकर बात हुई तो वे काफी उत्साहित दिखे।
उन्होंने बताया कि यहां से वे पहले भागलपुर जिले के सुल्तानगंज जाएंगे और फिर वहां से शुरू होगी असली कांवर यात्रा। नंगे पैर कांवर लेकर दरबार तक पहुंचने का सिलसिला जो शुरू होगा, वह जल चढ़ाने के बाद ही थमेगा। अपनी बात कहते-कहते दोनों ने जयकारा लगाना शुरू कर दिया तो बस में सवार कांवरियों की आवाज की गूंज ने हल्की बारिश के बीच सावन के दस्तक का अहसास करा दिया।
सज रहे मंदिर व शिवालय
भगवान शिव की स्तुति का महीना सावन बुधवार से शुरू हो रहा है। पहले दिन जुटने वाली भक्तों की भीड़ को देखते हुए शहर के शिव मंदिरों और शिवालयों का प्रबंधन खास तैयारी मेें जुटा है। मंदिरों और शिवालयों को सजाया जा रहा है। साफ-सफाई का भी विशेष इंतजाम किया जा रहा है। कई मंदिरों को झालरों से सजाया जा रहा है। झारखंडी ओर मुक्तेश्वरनाथ मंदिर जैसे ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर बैरिकेडिंग की तैयारी है, जिससे भक्त कतारबद्ध होकर आसानी से जल चढ़ा सकें। उधर, भक्तों को प्रसाद उपलब्ध कराने के लिए मंदिरों और शिवालयों के सामने अस्थायी दुकानों की तादाद भी बढ़ने लगी है। तैयारियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि सावन के पहले दिन अल सुबह से ही मंदिरों और शिवालयों के सामने मेले जैसा माहौल होगा।