आंगनबाड़ी वर्करों के दो से 28 सितंबर तक चले प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने वाले महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ में घर में ही रार शुरू हो गई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पांडेय ने चंदे और सदस्यता शुल्क में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जिलाध्यक्ष गीतांजलि मौर्या को पद से हटा दिया है। गीतांजलि ने प्रदेश अध्यक्ष पर ऐसे ही आरोपों का पलटवार करते हुए खुद पद छोड़ने की बात कही है।
प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पांडेय ने गीतांजलि पर गद्दारी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि आंदोलन के बीच 22 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपने के बाद भी हम अपनी मांगों पर अड़े थे। गोरखपुर की जिलाध्यक्ष ने गद्दारी कर मुख्यमंत्री से वार्ता की और पीठ में छूुरा घोंपने का कार्य किया। इसके चलते उन्हें पदमुक्त कर दिया है।
इसके उलट गीतांजलि का कहना है कि उन्होंने खुद जिलाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया है। प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चार महीने के जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में अगर उन्होंने 50 हजार वसूल लिए तो 25 साल से संगठन चला रहे गिरीश पांडेय हर जिले से मिलने वाले 25 हजार के चंदे का हिसाब बताएं। उन्होंने प्रदेश भर की वर्करों को वह बिना रणनीति के लखनऊ बुला लिया और जब उन पर लाठीचार्ज हो गया तो वह बिना वार्ता धरना समाप्ति की घोषणा कर दी। वार्ता के जरिए हमने आंगनबाड़ियों को कुछ तो दिलाया।
पड़ सकती है एक और संघ की नींव
गोरखपुर। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ में प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार से जहां संगठन दो गुटों में बंटने के आसार पैदा हो गए हैं, वहीं एक और संगठन की बुनियाद पड़ने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश भर में वर्करों की खासी बड़ी संख्या भी दो गुटों को अलग-अलग इकाई का रूप देने में सहायक हो सकती है।