एक्टिंग की बारीकियां बताते अमन वर्मा।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
मशहूर फिल्म अभिनेता और एंकर अमन वर्मा का कहना है कि यूं तो एक्टिंग और एंकरिंग दोनों ही कामों की अपनी-अपनी चुनौतियां हैं लेकिन यदि तुलना की जाए तो एंकर का काम एक्टर से कठिन है। एक्टर को निर्माता और निर्देशक की ओर से तय फार्मेट और डायलॉग के दायरे में किरदार निभाना होता है जबकि एंकर को कई बार खुद तय करना होता है कि वह दर्शकों के सामने कैसा मनोरंजन परोसे।
एक्टिंग क्लास के सिलसिले में शनिवार को गोरखपुर पहुंचे खुल जा सिमसिम के एंकर अमन ने बताया कि एंकरिंग में पूरा व्यक्तित्व उभर के सामने आता है। बौद्धिकता के साथ हाजिर-जवाबी एक बेहतर एंकर की पहचान बनती है। फिल्म और टीवी शो में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके अमन टीवी-शो को कलाकारों का सहारा मानते हैं। बागबान फिल्म में अमिताभ के बड़े बेटे का रोल करने वाले अमन का कहना है कि कई बार फिल्मों से ज्यादा लोकप्रियता टीवी-शो से मिल जाती है।
फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों बढ़े परिवारवाद से नए कलाकारोें को चांस न मिल पाने के सवाल पर अमन का कहना है कि बिना टैलेंट के फिल्म इंडस्ट्री में टिकना मुश्किल है। इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे तमाम कलाकार हैं, जो छोटे-छोटे कस्बों और शहरों में मुंबई पहुंचे और आज नए कलाकारों के लिए नजीर बने हुए हैं।
अमन ने बताई अभिनय की बारीकियां
गोलघर में मौजूद ‘मैड फिल्म इंटरटेनमेंट इंस्टीट्यूट’ में शनिवार को मशहूर फिल्म कलाकार अमन वर्मा एक्टिंग सीख रहे विद्यार्थियों के बीच थे। इस दौरान अमन ने न केवल उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के बारे विस्तार से बताया बल्कि फिल्म में काम हासिल करने के लिए होने वाली खासियत से रू-ब-रू कराया। एक घंटे तक चली क्लास में विद्यार्थियों ने अभिनय की तमाम बारीकियां सीखीं। विद्यार्थियों ने इस दौरान एक्टिंग से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिसका जवाब देकर अमन ने उनकी जिज्ञासा शांत की। अमन ने विद्यार्थियों को बताया कि टैलेंट के लिए फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं।