ईएनटी चिकित्सकों ने प्रोजेक्टर और टीवी स्क्रीन पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को ऑपरेशन करते हुए लाइव देखा।
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गोरखपुर। राजदीप ईएनटी हॉस्पिटल एवं माइक्रोसर्जरी सेंटर में शुक्रवार को ईएनटी चिकित्सकों की प्रदेश इकाई की 35वीं वार्षिक गोष्ठी यूपीकॉन शुरू हुई। कार्यक्रम की शुरुआत सर्जिकल सेशन से हुई। इसमें ईएनटी चिकित्सकों ने प्रोजेक्टर और टीवी स्क्रीन पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को ऑपरेशन करते हुए लाइव देखा।
इसके बाद रात में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ‘टेंपोरल बोन डिसेक्शन’ पर कार्यशाला हुई। देश के सुप्रसिद्ध कान, नाक, गला विशेषज्ञ बेंगलुरु डॉ. एच विजयेंद्र तीन दिवसीय इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि हैं। आयोजक अध्यक्ष डॉ. वाईसी यादव और सचिव डॉ. राजेश यादव ने पहले सभी अतिथि चिकित्सकों का स्वागत किया, फिर सर्जिकल सेशन हुआ। इस वार्षिक गोष्ठी में देश भर के कई जाने-माने ईएनटी चिकित्सक हिस्सा ले रहे हैं।
ये है टेंपोरल बोन डिसऑर्डर
सबसे पहले टेंपोरल बोन डिसेक्शन सर्जरी हुई। यह कान की हड्डी होती है। तीन हड्डियां आपस में जुड़कर घोड़े के नाल की तरह रूप ले लेती हैं। इससे मरीज सुनने की क्षमता खोने लगता है। ऑपरेशन से इन हड्डियों को अलग किया जाता है। इससे मरीज के सुनने की क्षमता वापस आ जाती है।
कृत्रिम पर्दा किया तैयार
दूसरी सर्जरी में कान में नया पर्दा लगाया गया। इसमें चिकित्सक ने मांसपेशी की झिल्ली का पर्दे की जगह इस्तेमाल किया। चिकित्सक ने बताया कि 98 से 99 प्रतिशत तक मामलों में मरीज इस ऑपरेशन के बाद सुनने की क्षमता वापस पा लेता है।
बच्चे के फेफड़े से सीटी निकाली
तीसरी सर्जरी में नाक के मांस का निदान किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि एलर्जी से नाक में मांस बढ़ने की समस्या हो सकती है। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने रात में एक बच्चे के फेफड़े में फंसी सीटी सर्जरी के जरिए बाहर निकाली।
मूक-बधिर बच्चे हो सकते हैं ठीक
कॉक्लर इम्पलांट से पैदाइशी मूक-बधिर बच्चों में सुनने और बोलने की क्षमता विकसित हो सकती है। डॉ. राजेश यादव ने यूपीकॉन-2017 में व्याख्यान के दौरान ये बात कही। बताया कि जन्म के समय टेंपोलर हड्डी और कॉक्लर नस में गड़बड़ी होने से बच्चों में सुनने की क्षमता का विकास नहीं होता। इससे बच्चा बोल भी नहीं पाता। मेनेन्जाइटिस और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के कारण भी कॉक्लर नसों को नुकसान पहुंचता है। ऐसी बीमारियों में भी यह इम्पलांट कारगर है। यह नई खोज है। कॉक्लर इम्पलांट करीब साढ़े छह लाख रुपये का है।