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आरक्षण तय नहीं होने से पार्षदों में असमंजस

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गोरखपुर।
विशाल नगर निगम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन साथ ही असमंजस में हैं कि जिन वार्डों में उनकी थोड़ी बहुत पकड़ है, वह आरक्षित तो नहीं हो जाएगा। ऐसी स्थित कई दावेदारों की है। जबकि नगर निकायों के चुनाव में करीब दो महीने ही बचे रह गए हैं। नवंबर में निकायों के चुनाव की संभावना है, लेकिन अब तक वार्डवार आरक्षण तय नहीं होने से प्रत्याशियों में असमंजस की स्थिति है। उनके मन में चुनाव लड़ने को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब तक शासन ने नगर निगम से वार्डवार आरक्षण की सूची नहीं मांगी है।
जुलाई में नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो चुका है। बोर्ड के खत्म होने के तीन चार महीने पहले से ही विभिन्न वार्डों में दावेदारों की गतिविधियां बढ़ गई थी। क्षेत्र की समस्याओं आदि को लेकर उनका धरना-प्रदर्शन शुरू हो चुका था, लेकिन शासन ने नगर निकायों के चुनाव को नवंबर तक टाल दिया। ऐसे में प्रत्याशियों का जोश ठंडा पड़ गया। रही सही कसर वार्डवार आरक्षण लिस्ट के जारी न होने ने पूरी कर दी है।
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गोरखपुर नगर निगम में 70 वार्ड हैं। आरक्षण के नियमों के अनुसार 15 वार्ड अनुसूचित जाति के (8 महिला), 19 वार्ड पिछड़ा वर्ग (10 महिला) के लिए आरक्षित होना है। नए आरक्षण रोस्टर के अनुसार वार्डों का आरक्षण नए सिरे से तय होना है, लेकिन अब तक आरक्षण की सूची तैयार नहीं हो सकी है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र ने बताया कि अब तक शासन से वार्डवार आरक्षण की सूची नहीं मांगी गई है। हालांकि वार्डवार पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या की गणना हो चुकी है।
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