गोंडा। जल ही जीवन मिशन न सिर्फ लोगों की प्यास बुझाएगा, बल्कि लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आया है। मिशन के तहत जिले में प्रदूषित पेयजल वाली 320 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है।
प्रथम फेज में इन ग्राम पंचायतों में 885 करोड़ से पानी की टंकी बनेगी और टंकियों के संचालन के लिए गांव में ही स्थायी कमेटी बनेगी जिन्हें मानदेय दिया जाएगा और यही कमेटी समस्याओं का निस्तारण करेगी। हर गांव में पांच लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा। ऐसे में 1600 लोग रोजगार युक्त होंगे।
कहा जाता है कि विकास का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूल सुविधाएं गांव तक पहुंचाने के लिए प्रयास भी जारी है। बिजली व सड़क से गांवों को जोड़ दिया गया, लेकिन पेयजल की किल्लत गांवों में बरकार है।
पहले कुएं का पानी दूषित हुआ तो इंडिया मार्का हैंडपंप ने स्थान लिया और अब इंडिया मार्का हैंडपंप भी खराब हो गया। केंद्र सरकार ने जल ही जीवन मिशन के तहत जिले के उन 320 गांवों का चयन किया है जहां का पानी दूषित है। पानी में आर्सेनिक, आयरन, क्लोराइड, फ्लोराइड सहित अन्य तत्व पाए गए थे। करीब नौ साल पहले हुए सर्वे में यह खुलासा हुआ था।
पेयजल के लिए कई योजनाएं संचालित हुईं लेकिन पेयजल की समस्या दूर नहीं हो पाई। सरकार ने इस बार 320 ग्राम पंचायतों में ओवरहेड टैंक बनाने के लिए 885 करोड़ का बजट आवंटित किया है। टंकियों व पाइप लाइन बिछाने का काम लार्सन एंड टर्बो को दिया गया है। एक करोड़ से चार करोड़ की लागत में एक पानी की टंकी का निर्माण होगा। पाइप लाइन बिछाने पर 50 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक खर्च होगा।
सरकार पानी की टंकी बनाने व पाइप लाइन बिछाने का काम संस्था करेगी। इसके लिए गांवों पूंजीगत खाता खोला जाएगा। इस खाते में सरकार पैसा देगी जिसका भुगतान ग्राम पंचायत को ही करना होगा।
इसके बाद दूसरा खाता संचालन व रखरखाव का खुलेगा। इसमें पानी का कनेक्शन लेने वालों को दस प्रतिशत अंशदान जमा करना होगा। साथ ही नियमित टंकियों के संचालन के लिए हर माल जलकर भी देना होगा जिससे पेयजल की समस्या न हो। इसी अंशदान से टंकियों का रखरखाव, पाइप लाइन की मरम्मत, केयर टेकर का मानदेय भी दिया जाएगा।
हर गांव में पांच सदस्यीय कमेटी पेयजल समस्याओं का समाधान करेगी। इसके लिए लोक सेवा मिशन सहित पांच संस्थाओं को जागरूक करने का दायित्व दिया गया है। इस कमेटी द्वारा केयर टेकर, इलेक्ट्रीशियन सहित अन्य पांच लोगों का चयन किया जाएगा। ये सभी स्थाई रोजगार पर रहेंगे और ग्राम पंचायत की ओर से मानदेय का भुगतान किया जाएगा। ऐसे में पहले फेज में 320 ग्राम पंचायतों में करीब 1600 लोगों को रोजगार मिल सकेगा।