लगोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की सेवा बर्खास्तगी मामले में एक रोचक मामला सामने आया है। पहले विभाग ने नियमों की अनदेखी करके मृतक आश्रित के एक पद पर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की नियुक्ति कर दी। फिर तीनों से 19 साल तक सेवाएं लेने के बाद दो शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया और तर्क दिया कि मृतक आश्रित पद पर एक ही नियुक्ति का नियम है।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और 19 साल सेवा लिए जाना भारी पड़ा। हाईकोर्ट ने बर्खास्त किए गए दोनों शिक्षकों को 10 साल बाद फिर से लेने का आदेश दे दिया। अब दोनों की सेवाएं तो बहाल कर दी गईं हैं लेकिन वेतन नहीं दिया जा रहा है।
मामला छपिया के प्राइमरी स्कूल मनीपुर ग्रंट से जुड़ा है। यहां के प्रधानाध्यापक गया प्रसाद चतुर्वेदी की मृत्यु सेवाकाल में वर्ष 1978 में हो गई थी। मृत्यु के 12 साल बाद शिक्षक के तीनों पुत्रों विजय प्रताप चतुर्वेदी, अटल बिहारी चतुर्वेदी व कष्ट बिहारी चतुर्वेदी को मृतक आश्रित के तहत वर्ष 1990 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की।
बेसिक शिक्षा विभाग को 19 साल बाद याद आया कि मृतक आश्रित पर एक ही पुत्र को नौकरी देने का नियम है और फिर 29 जून 2009 को दो शिक्षकों को सेवा से हटा दिया। वर्ष 2009 के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीकांत सिंह ने भर्तियों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए दोनों शिक्षकों की सेवाएं तो समाप्त कर दीं, लेकिन 19 साल तक सेवाएं लिए जाने के मामले से आंखें फेरी रखीं।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और फिर 10 साल की लंबी लड़ाई चली। शिक्षक पद से सेवा से हटाए गए अटल बिहारी चतुर्वेदी और कष्ट बिहारी चतुर्वेदी ने दावा किया कि उन्हें विभाग की ओर से नियुक्ति मिली और प्रशिक्षण कराया गया। इसके अलावा उन्होंने 19 साल की सेवा के दौरान विभाग के किसी आदेश की अनदेखी नहीं की।
विभाग भी हाईकोर्ट में यह साबित नहीं कर सका कि दोनों शिक्षकों ने सेवा के दौरान कोई गड़बड़ी की है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब दोनों शिक्षकों ने 1990 से 2009 विभाग के दिशा निर्देशों का पालन किया और विभाग में सेवाएं दीं तो सेवा से हटाना गलत है। हाईकोर्ट के आदेश पर भी सेवा बहाली का आदेश जारी नहीं हुआ तो अवमानना वाद दायर हुआ।
अगस्त 2019 में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया। इसके बाद दोनों शिक्षकों को फिर से सेवा में लेने का आदेश बीएसए ने जारी कर दिया। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को दोनो शिक्षकों की सेवाएं फिर से बहाल करने के आदेश दिए और शिक्षण कार्य लिए जाने को कहा। अब दोनों शिक्षक शिक्षण कार्य माह अगस्त से कर रहे हैं।
सेवा में 10 साल बाद बहाल होने के बाद शिक्षक अटल बिहारी चतुर्वेदी व कष्ट बिहारी चतुर्वेदी को अवशेष वेतन का भुगतान हो गया है। दोनों शिक्षकों को नियमित वेतन माह अगस्त के बाद से नहीं मिल रहा है। शिक्षक अटल बिहारी का कहना है कि वेतन भुगतान होना चाहिए, एक दूसरे के ऊपर पर मामले को टाल कर लटकाया जा रहा है। दोनों शिक्षकों को जब अवशेष का वेतन दे दिया गया तो वेतन देने में देरी विभाग कर रहा है।
खंड शिक्षा अधिकारी छपिया अर्जुन वर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर सेवा में बहाली किए जाने पर कार्यभार ग्रहण करा लिया गया है। सेवा अवधि के अवशेष का वेतन भुगतान हो गया है। नियमित वेतन की कार्रवाई चल रही है, वेतन तय करने होने की प्रक्रिया में है। वेतन फिक्सेशन होने के बाद वेतन दे दिया जाएगा।