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गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली आज भी उपेक्षित

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परसपुर (गोंडा)। भगवान श्रीराम की मर्यादा को अपनी लेखनी से जन-जन तक पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास की पावन जन्मस्थली की उपेक्षा का दंश क्षेत्रवासियों को परेशान कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण कार्य शुरू हो जाने के बावजूद रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास का जन्म स्थान विकास खंड परसपुर का ग्राम राजापुर सूकरखेत अभी भी पूरी तरह उपेक्षित है।
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शासन, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा व लापरवाही के चलते ही यह धार्मिक व ऐतिहासिक स्थान हमेशा हाशिए पर रहा। गरिमा के अनुकूल यहां विकास कार्य न होने से क्षेत्रवासियों में भी रोष है। अवध धाम (अयोध्या) के चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के सांस्कृतिक व श्रीरामचरित मानस महाकाव्य के प्रणेता गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान को लेकर जनपद गोंडा का दावा अपने आप में सबसे पुख्ता और साक्ष्यों पर आधारित है। कलकल करती पतित पावनी मां सरयू की धारा सूकरखेत के पास राजापुर नामक गावं को गोस्वामी जी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को नव दिवसीय श्रीराम कथा सुनाकर अपने आप को धन्य किया था। जन्मस्थान से अयोध्या धाम मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है। प्रत्येक वर्ष यहां चैत्र मास में चौरासी कोसी परिक्रमा के लिये साधु-संत आकर रात्रि विश्राम के लिए यहां डेरा डालते हैं।
अवध धाम के चौरासी कोसी परिक्रमा दुलारे बाग, जम्बू दीप, गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर, सूकरखेत, भगवान वाराह की औतार स्थली व गुरु नरहरिदास का आश्रम पसका, सूकरखेत व मां वाराही देवी सहित अनेक धार्मिक स्थलों का कभी साधु-संत व श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। जन्मस्थान को लेकर गोस्वामी तुलसीदास ने खुद विनय पत्रिका में लिखा है। आलसी अभागे मोसे ते कृपालु पाले पोसे राजा मोरे राजा राम अवध सहरु। जिस वक्त उन्होंने यह पंक्तियां लिखी थी उस समय गोंडा का कोई अस्तित्व नहीं था। बताया जाता है कि तुलसी जन्मभूमि राजापुर से पांच किलोमीटर दक्षिण उनके गुरु नरहरिदास का आश्रम सूकरखेत पसका में आज भी विद्यमान है। यहां सहेज कर रखी रामचरित मानस की पांडुलिपि के अवशेष का कुछ भाग लोग गोस्वामी जी रचित मानते हैं।
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राजस्व अभिलेखों में दर्ज है आत्माराम टेपरा
अयोध्या धाम से सटे गोंडा के राजापुर सूकरखेत में गोस्वामी तुलसीदास के पिता आत्माराम के नाम का एक टेपरा (गोचर भूमि) जो आत्माराम टेपरा के नाम आज भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। यहां आज भी तुलसीदास जी के वंशज रहते हैं। उनकी वंश परंपरा के लोग तुलसी, उनके पिता आत्माराम व हुलसी के नाम श्राद्ध, पिंड दान व तर्पण करते हैं। गोस्वामी ने गोंडा, फैजाबाद (जो अब अयोध्या) की अवधी भाषा का प्रयोग किया है। यहां की लोक संस्कृति को उन्होंने सूक्ष्मता पूर्वक चित्रित किया है। उन्होंने अपनी रचना रामलला नहछू लिखी थी। नहछू नामक प्रथा केवल इसी क्षेत्र में प्रचलित है।
छलक रहा उपेक्षा का दर्द
परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास राष्ट्र के गौरव हैं। मानस की रचना कर उन्होंने विश्व को एक संदेश दिया है। शासन, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने उनके जन्म स्थान की हमेशा उपेक्षा की है। इसके विकास की ठोस पहल होनी चाहिए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद मिश्रा ने कहा कि तुलसीदास के जन्मभूमि के विकास में शासन-प्रशासन ने खास रुचि नहीं ली है। जिससे यह आज भी उपेक्षित हैं। जो चुनाव में मुद्दा बन सकता है। गिरीश नारायण सिंह बब्लू सिंह ने कहा कि इस स्थली के विकास के लिए सरकार तत्काल ध्यान दे ताकि गोस्वामी जी की जन्मस्थली का उनके गरिमा के अनुकूल विकास हो सके।
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