गोंडा। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के विरोध में शनिवार को पूरा स्वास्थ्य महकमा सड़क पर उतर आया। चिकित्सकों के विभिन्न संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए कोलकाता की डॉक्टर के हत्यारों को फांसी की मांग की। पूरे जिले में इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। इस दौरान 400 से अधिक ऑपरेशन टल गए। करीब तीन हजार मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. एसके मिश्र ने बताया कि जिले में 149 डॉक्टर संगठन के सदस्य हैं। शनिवार सुबह से इन सभी डॉक्टरों ने 24 घंटे के लिए पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार किया है। वहीं, रेजिडेंट व पीएमएस के 60 डॉक्टर भी कामकाज बंदकर आंदोलन में शामिल हो गए हैं। डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज से गांधी पार्क तक पैदल मार्च निकालकर 'डॉक्टर के हत्यारों को फांसी दो, वी वांट जस्टिस, सेफ्टी नहीं तो ड्यूटी नहीं...' के नारे लगाए।
डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर मजिस्ट्रेट को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें कोलकाता की घटना के दोषियों की गिरफ्तारी, त्वरित सुनवाई कर अतिशीघ्र सजा दिलाने, डॉक्टरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए केंद्रीय कमेटी के गठन और इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे पुलिस की तैनाती की मांग की गई। इस दौरान पीएमएस के अध्यक्ष डॉ. जय गोविंद, डीपीए के अध्यक्ष सालिगराम त्रिपाठी, एनएचएम के अध्यक्ष डॉ. मधुसूदन सिंह के अलावा डॉ. ओएन पांडेय, डॉ. डीके राव, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. मनोज सिन्हा, डॉ. अनीता मिश्रा, डॉ. राकेश पांडेय, डॉ. गुंजन भटनागर, डॉ. आयुषी सरदाना, एमआर अध्यक्ष संतोष शुक्ल आदि मौजूद रहे।
निजी डॉक्टरों की ओपीडी बंद होने के कारण शनिवार को मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। मगर सुबह दस बजे यहां भी पर्चा काउंटर पर ताला लटक गया। इससे पहले जिन मरीजों ने पर्चे बन गए थे, उन्हें भी ओपीडी बंद होने के चलते बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। बग्गी रोड निवासी संदीप के बेटे का पैर टूटा था, प्लास्टर चढ़वाना था मगर आर्थो वार्ड बंद होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। शहर के महराजगंज से आए शाहिद को तेज बुखार था मगर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उन्हें मेडिकल स्टोर से ही दवा लेकर लौटना पड़ा। वहीं, कई गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर दिया गया। आईएमए के अनुसार जिले में प्रतिदिन 350 से अधिक ऑपरेशन होते हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में 50 ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में शनिवार को करीब चार सौ ऑपरेशन टल गए।
मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए इमलिया गुरुदयाल निवासी संतराम ने कहा कि कोलकाता की घटना बेहद दुखद है। सरकार को इस पर कड़ा निर्णय लेना चाहिए। हम भी चाहते हैं कि डॉक्टर सुरक्षित रहें, लेकिन उपचार बाधित नहीं करना चाहिए। इटियाथोक के पारासराय निवासी गुड़िया देवी को आंखों में समस्या थी, उन्हें भी बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। मगर उन्होंने भी कोलकाता की घटना को लेकर विरोध जताया। कहा कि हम दूसरे दिन उपचार करा लेंगे लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।