गोंडा। किसान नेताओं की अपीली पर सोमवार को होने वाले रेल रोको अभियान का जिले में कोई खास असर देखने को नहीं मिला। लखीमपुर कांड के आरोपी गृह राज्यमंत्री की गिरफ्तारी की मांग व कृषि कानूनों को लेकर विरोध कर रहे किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को देशभर में रेल चक्का जाम की योजना बनाई गई थी।
इसको लेकर शासन के निर्देश पर रविवार रात से ही सिविल पुलिस, पीएसी, आरपीएफ, जीआरपी के जवानों ने पूरे रेल ट्रैक, स्टेशन व प्लेटफार्मों पर अपना जाल बिछा दिया। चौकस सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण एक भी आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक के किनारे फटक तक नहीं सका। बभनान में कुछ किसान नेताओं ने प्रदर्शन किया और रेलवे ट्रैक के किनारे तक नहीं जा सके लिहाजा प्रशासन के अधिकारियों को वहीं पर ज्ञापन सौंप दिया।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रभारी वंशराज वर्मा की अगुवाई में बभनान में रेल रोको आंदोलन की योजना बनाई गई थी, लेकिन सिर्फ राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर संतोष करना पड़ा। ज्ञापन में किसानों ने मांग किया कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र को तत्काल पद से हटाया जाय।
गन्ना मूल्य पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल किया जाये। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाय। एमएसपी की गारंटी दी जाए। मोतीगंज, बरूआचक, बभनान, मसकनवा, कचेहरी, गोंडा रेलवे स्टेशन, मैजापुर, करनैलगंज व सरयू, सुुभागपुर, इटियाथोक, मनकापुर आदि रेलवे स्टेशनों को संबंधित थानों की पुलिस के साथ पीएसी, आरपीएफ सहित अन्य पुलिस के जवानों ने घेरा बनाकर किसी को फटकने तक नहीं दिया।
मोतीगंज पुलिस ने स्टेशन को छावनी में तब्दील कर दिया था। किसानों के रेलवे ट्रैक पर बैठे जाने की सूचना गोपनीय स्तर से मिलने पर मोतीगंज थानाध्यक्ष मोतीगंज ब्रह्मानंद सिंह ने बताया कि किसान रेलवे ट्रैक पर न बैठ पाएं इसलिए बरुआचक व मोतीगंज स्टेशन पर थाने की पुलिस के अलावा जीआरपी व आरपीएफ भी सुरक्षा की दृष्टि से मौजूद रही।
गोरखपुर से चलकर गोंडा को जाने वाली पैसेंजर ट्रेन मोतीगंज व बरूआचक रेलवे स्टेशन क्रास कर गई तब जाकर पुलिस कर्मियों ने राहत की सांस ली। बीते 3 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी में हुए कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया था कि 18 अक्तूबर को 6 घंटे के लिए ट्रेनों का संचालन बंद करवाया जाएगा।