गोंडा। शहरी क्षेत्रों के विकास पर सरकारों ने करोड़ों का बजट खर्च किया लेकिन शैक्षिक विकास से आंखें फेरे रखा। 1982 में नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों का कैडर अलग हो गया। इसके बाद भर्तियों से शहरी स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हुई। अब प्रदेश की योगी सरकार ने शहरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने की पहल शुरू की है। हाल ही में जारी तबादला नीति में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के पदस्थापना का रास्ता खोल दिया है। इससे 37 साल बाद शहरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद बढ़ गई है। मार्च 2020 तक शहरी स्कूलों को शिक्षक मिल सकेंगे। इससे शहरी स्कूल भी गुलजार होंगे और यहां छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी।
विभाग की एक नीति से 37 सालों से शहरी क्षेत्र के बेसिक शिक्षा स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नही हुई। 1982 के बाद शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों का कैडर तय होने से नियुक्तियों के न होने से शहर के सरकारी स्कूलों की दशा बिगड़ती रही। लोग रिटायर तो हुए लेकिन नई नियुक्ति नही हुई। विभाग के अधिकारियों की मानें तो वर्ष 1994 में शहर के सरकारी स्कूलों को सिर्फ 5 उर्दू शिक्षक ही मिले थे। इसके बाद मृतक आश्रित से 10 नए शिक्षकों की नियुक्ति हुई, लेकिन इससे शिक्षकों की कमी दूर नही हुई। एक बार वर्ष 2012-13 में नगर क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षकों से आवेदन तो मांगे गए, लेकिन फिर रोक लग गई।
मौजूदा समय में जिले के तीन नगर क्षेत्रों में 47 परिषदीय स्कूल हैं और सिर्फ 31 शिक्षक ही है। इससे करीब 18 स्कूल शिक्षक विहीन हैं। इन 18 सरकारी स्कूलों में 12 स्कूलों को शिक्षा मित्रों के सहारे संचालित किया जा रहा है। वहीं 5 जूनियर हाईस्कूलों को प्राइमरी स्कूल के शिक्षक एक ही परिसर में होने से संचालित कर रहे हैं। लेकिन शिक्षक न होने से पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है। शहरी स्कूलों की ऐसी स्थिति की तरफ न तो कभी जिले के अधिकारियों का ध्यान गया और न ही सरकार के स्तर से ही कोई प्रयास हुआ। 37 साल पहली बार प्रदेश सरकार ने नगर क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक देने की पहल शुरू की है। अंतरजनपदीय तबादलों के लिए जारी गई नीति में नगर क्षेत्रों में शिक्षकों के तैनाती का रास्ता खोला है।
न सुविधाओं की कमी और न ही छात्रों की, बस शिक्षक नही
शहरी क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में न तो सुविधाओं की कमी है और न ही छात्रों की। शिक्षकों की कमी से स्कूलों से लोगों का मोह भंग हो गया है। गोंडा शहर के साथ ही करनैलगंज व नवाबगंज में 47 परिषदीय स्कूलों में 36 प्राइमरी और 11 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनके भवन हैं कुछ के भवन जर्जर हो चुके हैं। सरकारी सभी सुविधाएं ड्रेस, जूता मोजा, स्वेटर, किताब, एमडीएम मिलता है। लेकिन शिक्षकों की कमी से स्कूलों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है।
नगर क्षेत्र के 36 प्राइमरी स्कूलों में 4271 छात्र और 11 जूनियर हाईस्कूलों में 722 छात्र पंजीकृत हैं। 36 प्राइमरी स्कूल के सापेक्ष 24 शिक्षक हैं और 11 जूनियर हाईस्कूलों के सापेक्ष 7 शिक्षक हैं। इसमें भी मार्च 2020 में 5 शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस तरह 47 स्कूलों के सापेक्ष सिर्फ 26 शिक्षक ही अप्रैल 2020 तक रहेंगे। स्कूलों में शिक्षकों की नियमित नियुक्ति होती तो छात्रों की संख्या में हर साल इजाफा होता।
कायाकल्प के साथ ही शिक्षकों की तैनाती से खिलेंगे स्कूल
अस्तित्व से जूझ रहे शहरी स्कूलों की स्थिति में अब सुधार होगा। सरकार ने शहरी स्कूलों के कायाकल्प के लिए नगर पालिका के साथ तालमेल करने की पहल की है। इससे स्कूलों के भवनों को चमकाने की योजना बनेगी। इसके साथ ही अंतरजनपदीय तबादलों से मार्च 2020 में शिक्षकों की कमी दूर होगी। इससे शहरी स्कूलों का आंगन गुलजार होगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र मिश्र ने प्रदेश सरकार की इस पहल को सराहा। कहा कि अधिकारियों की ओर से शासन को पहले सही जानकारी नही दी जाती थी। लोगों को यह पता था कि शहरी स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि शहरी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे। अब सरकार को सही स्थिति की जानकारी हुई है और सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों स्कूलों की स्थिति में बड़ा सुधार होगा।
शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर रोक होने के कारण नियुक्ति नही हो पाई थी। शिक्षकों की कमी है, अब प्रदेश सरकार ने नगर क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों के तैनाती की पहल की है। इससे शहरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी। -मनिराम सिंह, बीएसए