गोंडा में जिला अस्पताल के नेत्र विभाग के ओपीडी में खड़े बुजुर्ग।
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गोंडा। जिला अस्पताल में मरीजों के निशुल्क इलाज का दावा खोखला साबित हो रहा है। आंखों के मुफ्त इलाज की आड़ में जिला अस्पताल के चिकित्सक व स्टाफ मरीजों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। इसके तहत आंख के मोतियाबिंद के आपरेशन के एवज में पांच हजार और लेंस डालने के लिए छह हजार तक की वसूली मरीजों से की जा रही है। इसके लिए ओपीडी में मरीज के पहुंचते ही अस्पताल का स्टाफ मोलभाव शुरू देता है।
डॉक्टरों के इशारे पर विभाग में खुलेआम घूमने वाले दलाल मरीजों से बताते हैं कि ‘सही’ ऑपरेशन और ‘सही’ लेंस डलवाने के लिए यह पैसा लिया जाता है। मांग के अनुसार पैसा न देने पर सीधे कहा जाता है कि आगे ऐसे में आपरेशन के बाद डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं होगी।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीजों से वसूली का नया तरीका इजाद किया है। इसके लिए डॉक्टर के इशारे पर ही तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मी व कुछ अन्य लोग दलाल की भूमिका निभाते हैं। इससे बिना किसी परेशानी के डॉक्टर साहब का कट बिजनेस के कालर भी गंदे न हों और वसूली भी चलती रहे।
यह दलाल ओपीडी से लेकर वार्डों तक घूमते रहते हैं। मरीज के ओपीडी से निकलने के बाद मरीजों को डॉक्टर का रेट कार्ड बताया जाता है। मरीजों को बताया जाता है कि आज कल फ्री में कुछ नहीं होता है। इसके चलते ही हलधरमऊ के बंजरिया से आए एक बुजुर्ग से भी आंख के इलाज के लिए 2500 रुपये और इंद्रापुर से आई बुर्जग महिला से एक हजार रुपये की वसूली की गयी।
जिले में डेंगू के मरीजों की बढ़ती तदात को देखते हुए जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड तो बना दिया गया, लेकिन यहां भर्ती मरीजों के बेड पर मच्छरदानी तक नदारद है। बुखार के पीड़ित मरीजों के लिए डेंगू वार्ड बनाने के निर्देश हैं। वहीं मच्छरदानी प्रत्येक बेड पर लगाने के लिए कहा गया है, लेकिन जिला अस्पताल में बिना मच्छरदानी के ही डेंगू वार्ड बना दिया गया है। इस वार्ड में महिला और पुरुष दोनों को ही भर्ती किया जा रहा है।