फोटो-1 गोंडा के जिला अस्पताल में टेलीमेडिसिन के जरिए मरीज को ऑनलाइन परामर्श देती डॉ शिवांगी राज। (?
- फोटो : GONDA
गोंडा। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को ओपीडी की परामर्श सुविधा अब घर बैठे ही मिलेगी। अस्पताल प्रशासन की तरफ से शुरू हुई टेली मेडिसिन सेवा मरीजों के लिए बड़ी सौगात बनेगी। इससे न केवल अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ कम होगी वरन घर बैठे ही विशेषज्ञ चिकित्सक के परामर्श की सुविधा से राहत भी मिलेगी। जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के बगल कक्ष संख्या दो को टेली मेडिसिन विभाग बनाया गया। जहां बैठे डॉक्टर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मरीजों की कॉल को सुनकर उन्हें चिकित्सकीय मशवरा देने का कार्य कर जरूरी दवाएं भी बताएंगे।
जिला अस्पताल में इसकी औपचारिक शुरूआत कोरोना संक्रमण काल में मरीजों को फोन पर परामर्श देने की सुविधा के साथ हुई थी। अस्पताल प्रशासन ने इस सुविधा के फायदे को देखते हुए टेली मेडिसिन सेवा को नियमित तौर पर शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ई-संजीवनी एप के माध्यम से मरीजों को घर बैठे इलाज की सुविधा मिलेगी। इस एप में पंजीकृत होने के बाद मरीज को अस्पताल जाकर ओपीडी की लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। वह फोन पर ही डॉक्टर को बीमारी और समस्या बताने के बाद सलाह ले सकेंगे।
जिला अस्पताल में शुरू हुई ई-संजीवनी ओपीडी के बाद से मरीजों का रुझान भी इसकी तरफ बढ़ने लगा है। इसके चलते ही अब रोजाना जिले से कम से कम 150 से 160 मरीज ई-संजीवनी एप के माध्यम से डॉक्टरों को अपनी बीमारी बताकर स्वास्थ्य संबंधी परामर्श ले रहे हैं। इसमें सामान्य रोगियों के साथ ही गर्भवती भी शामिल हैं। टेलीमेडिसिन विभाग में डॉ. शिवांगी राज, डॉ. ताबिश महमूद खां व डॉ. लकी द्विवेेदी की ड्यूटी लगाई गई है, जो मरीजों को परामर्श देने के साथ उचित दवाओं का सुझाव दे रहे हैैं।
डाउनलोड करना होगा ई-संजीवनी एप
टेेली मेडिसिन की सुविधा लेने के लिए मरीजों को ई-संजीवनी एप डॉउनलोड करना होगा। रजिस्ट्रेशन करने पर ओपीडी रोगी पंजीकरण फार्म खुलेगा। जिसमें मरीज से संबधी जानकारी भरने पर टोकन जनरेट का विकल्प आएगा। टोकन जनरेट करने के बाद मरीज के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रोगी की आईडी व टोकन नंबर का मैसेज आ जाएगा। इस टोकन नंबर से जानकारी मिलेगी कि उसका नंबर कितने मरीजों के बाद आएगा। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसके रावत ने बताया कि मरीज ओटीपी नंबर के माध्यम से बार-बार अपना टोकन नंबर देख सकता है। इस सुविधा में मरीज डॉक्टर से ठीक उसी प्रकार चर्चा कर सकता है जैसे ओपीडी में करता है। रजिस्ट्रेशन के बाद मरीज को एप पर मिले विकल्प में लिखना होगा कि वह किस बीमारी के लिए डॉक्टर से बात करना चाहता है।
,