फोटो-3 गोंडा के जिला अस्पताल में एक्स-रे प्लेट न होने के कारण मोबाइल में फोटो लेता तीमारदार। (संवाद
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गोंडा। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता कम होने का नाम नहीं ले रही है। रुपईडीह के बनगाई निवासी राम निरंजन जिला अस्पताल में टूटी हड्डी के दर्द से कराह रहे हैं और उनके भाई अरुण जल्द ही डॉक्टर को दिखाकर दर्द दूर करने के लिए भाग दौड़ कर रहे हैं। अरुण की गलती बस यहीं है कि उनके पास स्मार्ट फोन नहीं है, और स्वास्थ्य विभाग के पास एक्स-रे प्लेट खत्म हो गई। अरुण किसी तरह लैब टेक्नीशियन से डॉक्टर के पास एक्स-रे रिपोर्ट वाट्सएप करवा पाए तो डॉक्टर ने देखने से मना कर दिया। हलधरमऊ के अहमद खान को भी एक्स-रे के लिए भटकना पड़ा। ये मामले बानगी मात्र हैं ऐसे कई समस्याएं जिला अस्पताल में आए मरीजों को झेलनी पड़ रही है जिससे उनका दर्द और भी बढ़ जाता।
जिला अस्पताल में पिछले दोमाह से डिजिटल एक्स-रे मशीन की फिल्म नहीं है। मरीजों को मोबाइल में फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाने का कहा जाता। ऐसे में जिला अस्पताल में इलाज कराने आए अधिकांश लोगों केे पास स्मार्ट फोन न होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल में रुपईडी के बनगाई निवासी अरुण अपने भाई के टूटे पैर का इलाज करान आए। जहां उन्हें एक्स-रे कराने को कहा गया, लेकिन एक्स-रे कक्ष में सिर्फ स्मार्ट फोन वालों को रिपोर्ट मिल पाती थी। अरुण के पास स्मार्ट फोन नहीं है। अरुण लैब टेक्नीशियन की मदद से एक्स-रे रिपोर्ट आर्थो सर्जन डॉ. हरिओम शर्मा को वाट्सएप करवा पाए तो डॉक्टर ने वाट्सएप पर रिपोर्ट देखने से मना कर दिया। वहीं, हलधरमऊ से आए अहमद खान को स्मार्ट फोन न होने से एक्स-रे रिपोर्ट नहीं मिल पाई। कर्मचारियों ने बताया कि जिला अस्पताल में हर रोज करीब दो सौ लोग एक्स-रे करवाने आते हैं, लेकिन प्लेट न होने से उन्हें रिपोर्ट के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यहां कर्मचारी नहीं तीमारदार खींचते हैं स्ट्रेचर
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने को करोड़ों रुपये व्यय किए जा रहे हैं। यहां के कर्मचारी मरीजों की मदद करने के स्थान पर आर्थिक लाभ तलाशने में लगे रहते हैं। मरीजों के तीमारदारों को मरहम पट्टी से लेकर स्ट्रेचर तक खुद ही खींचना पड़ता है। बुधवार को करनैलगंज के चौरी निवासी दद्दन गंभीर रूप से घायल होने के बाद हड्डी वार्ड में भर्ती थे उनके पिता खुद स्ट्रेचर खींचकर मरहम पट्टी कराने जा रहे थे। पूछने पर बताया कि कोई कर्मचारी न तो मरीज को देखने आता न ही कोई सहयोग करने आता है।
जिला अस्पताल में इस समय एक्स-रे प्लेट कम है। जिसके कारण सिर्फ मेडिकोलीगल वालों को एक्स-रे रिपोर्ट दी जाती, बाकी लोगों को मोबाइल में रिपोर्ट की फोटो दे दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति के पास स्मार्ट फोन न हो तो उसकी रिपोर्ट कर्मचारियों के माध्यम से डॉक्टर के पास भेजने की व्यवस्था की गई है। डॉ. एसके रावत, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल