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सत्यापन के फेर में 29 कर्मियों का मानेदय फंसा

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गोंडा। बेसिक शिक्षा में बीआरसी पर कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर और सहायक लेखाकारों की मुश्किलें बढ़ी हैं। छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। लगातार ड्यूटी भी कर रहे हैं। बीएसए से उनकी जांच करवाने की बात बताई जा रही है।
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ऐसा तब है जब नवीन संस्था के चयन के साथ यह शर्त कि कार्यरत कर्मियों के सेवा की निरंतरता बनाए रखी जाए। मानेदय भी समय से देने के आदेश थे। जिले के 17 बीआरसी व मुख्यालय पर 29 कर्मी कार्यरत हैं। सात नए नियुक्त हुए हैं, और नए को मानेदय भी दे दिया गया है।
जिले में बेसिक शिक्षा में कार्यरत आपरेटर और सहायक लेखाकारों का चयन वर्ष 2011 में हुई थी। हर माह ब्लाक से संतुष्टि प्रमाण पत्र मानदेय निर्गत होता है। तभी से सेवाएं सही चल रहीं थीं, इस बीच शासन ने जेम पोर्टल से नई आउटसोर्सिंग संस्था के चयन का आदेश दिया।
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डूडा के शहरी आजीविका केंद्र को कार्य मिला। पहले से कार्यरत कर्मियों की जांच के नाम पर मानेदय नहीं दिया जा रहा है। बीएसए विनय मोहन वन की मानें तो नई संस्था चयन होने के बाद जांच के लिए एक कमेटी बनी है। फिलहाल रिपोर्ट मिलने के बाद मानेदय देने की बात कही है। वहीं नई संस्था की ओर से भी जांच पूरी कराने के लिए कोई प्रयास नही किया जा रहा है।
बीआरसी केंद्रों के साथ ही मुख्यालय पर जिलाधिकारी की अनुमति से ही संस्था ने आवेदन करने वालों का चयन किया था। कार्यरत कर्मी शुभम सिंह, सुशील सिंह, प्रगेश सिंह, सत्येंद्र सिंह, अंकित सिंह आदि का कहना है कि वर्ष 2011 में जिलाधिकारी की अनुमति से चयन हुए थे।
उस समय डीओईओ स्तर की डिग्री मांगी गई थी और कंप्यूटर के एक वर्ष की डिग्रियों को उसके स्तर का माना गया था। वर्ष 2011 में जिले में ओ लेवल डिग्री के लिए संस्थान कम थे लेकिन एक अन्य डिग्रियां भी उसी के स्तर की हैं। शासनादेश में डीओआईओ डिग्री अनिवार्य होने के साथ ही उसके स्तर की डिग्री मांगी गई थी। नवीन संस्था चयन के आदेश में भी स्पष्ट है कि पहले से कार्य कर रहे कर्मियों को हटाया नही जाएगा।
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