गोंडा। आधी आबादी को निशुल्क व बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए बने जिला महिला अस्पताल में शाम होते ही मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया जाता है। मरीज भर्ती काउंटर से लेकर नर्सिंग स्टेशन तक सन्नाटा पसर जाता है, जिससे रात में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कोई भी कर्मचारी ढूढ़े नहीं मिलता। मजबूरी में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रविवार रात आठ बजे ही महिला अस्पताल के प्रथम तल पर सन्नाटा पसर गया। इमरजेंसी में मरीजों को भर्ती करने के लिए बने काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहा। कोई नर्स या कर्मचारी नजर नहीं आ रहा था।
वहीं स्टाफ नर्सो के बैठने वाले नर्सिग स्टेशन पर भी कुर्सी खाली रही है। रात आठ बजे नवाबगंज के गुड्डू व आयशा अपनी एक दिन की नवजात को भर्ती कराने के लिए महिला अस्पताल मे किसी स्टाफ की राह देख रहे थे। मरीजों को भर्ती के लिए बने काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहा।
महिला अस्पताल के प्रथम तल पर कोई नर्स या अन्य स्टाफ दिखाई नहीं पड़ रहा था। वहीं बच्चे की हालत बिगड़ते देख गुडृडू निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चले गए। सौरभ चतुर्वेदी भी अपने परिजन को भर्ती कराने के लिए अस्पताल के कर्मी की राह देख रहे थे, लेकिन कोई कर्मी न दिखाई पड़ने पर मायूस होकर निजी अस्पताल की ओर चल पड़े। ऐसे में मरीजों को 24 घंटे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा मुहैय्या कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है।
रात में गर्भवती महिलाओं को हालत गंभीर बताकर कर दिया जाता वापस
भर्ती मरीज के तीमारदार बताते हैं कि रात में यहां भर्ती नहीं किया जाता। अस्पताल में या तो नर्स या अन्य स्टाफ नदारद मिलता है।
यदि कोई स्टाफ मिल भी जाता तो गर्भवती महिलाओं की हालत गंभीर बताकर वापस कर दिया जाता है। वहीं रात अस्पताल में घूमते दलाल सरकारी डॉक्टरों के निजी अस्पतालों में भर्ती करने की सलाह देते उसका पता बताते रहते हैं।