गोंडा। जिला अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारियों की मनमानी मरीजों व तीमारदारों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल परिसर में गंदगी की भरमार है। अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बगल से पर्चा काउंटर तक जाने वाले रास्ते पर महीनों से गंदा पानी भरा है।
बीमारियां फैलने की आशंका हैं। अस्पताल में कर्मियों के होते हुए भी यहां पर महिला तीमारदारों को मरीजों का स्ट्रेचर खींचना पड़ रहा है। इसके साथ ही डॉक्टरों के समय से ओपीडी में न बैठने से मरीजों को दिन भर भटकना पड़ता है। शनिवार को जिला अस्पताल के अव्यवस्थाओं पर पेश रिपोर्ट-
जिला अस्पताल में वार्ड ब्वॉय व कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है। फिर भी मरीजों के तीमारदारों व खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। तीमारदार के अकेले ही स्ट्रेचर खींचने के कारण अक्सर मरीजों के गिरने की आशंका बनी रहती है।
जिला अस्पताल में अपने सास का इलाज कराने आई एक महिला खुद स्ट्रेचर खींच रही थी। पूछने पर पता चला कि डॉक्टर ने जांच लिखा है जिस पर वह स्ट्रेचर खींचकर जा रही है। जिला अस्पताल का कोई कर्मचारी बात सुनने को तैयार नही है। बड़ी मुश्किल से स्ट्रेचर ही मिला है।
शनिवार को वैसे तो बाजारों में वीकेंड लॉकडाउन रहता है लेकिन जिला अस्पताल के ओपीडी में लॉकडाउन का नजारा दिख रहा था। अधिकांश ओपीडी कक्ष में डॉक्टरों की कुर्सी खाली थी। बाहर खड़े मरीज डॉक्टर के आने की राह देख रहे थे।
दोपहर करीब 11 बजे बालरोग विशेषज्ञ कक्ष व सर्जन कक्ष समेत अधिकांश कक्षों में डॉक्टर नदारद दिखे। मनकापुर से आए राम उजागर ने बताया कि सुबह से ही बच्चे को दिखाने के लिए इंतजार कर रहा हूं लेकिन डॉक्टर साहब नहीं आए। डॉक्टरों के मनमानी के चलने दूर से आए मरीजों को पूरे दिन भटकना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से महीने भर से इमरजेंसी गेट के बगल गंदा पानी भरा हुआ है। ओपीडी पर्चा कटवाने जाने वाले मरीजों को गंदे पानी से गुजरना पड़ता है।
कई बार मरीज व तीमारदार गंदे पानी में फिसलकर गिर चुके हैं, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन इस तरफ ध्यान नही दे रहा है। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि जल निकासी की व्यवस्था नहीं है जिससे बरसात होने के बाद महीनो तक पानी भरा रहता है तब तक फिर बरसात हो जाती है।